म्यूचुअल फंड से सोना-चांदी में निवेश: बिना फिजिकल खरीदे कैसे उठाएं कीमतों की तेजी का फायदा?

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महंगाई, शेयर बाजार की अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव के समय में सोना और चांदी को हमेशा से सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है। हालांकि, हर निवेशक के लिए फिजिकल गोल्ड या सिल्वर खरीदना, उसे सुरक्षित रखना और बेचते समय शुद्धता की चिंता करना आसान नहीं होता। ऐसे में म्यूचुअल फंड निवेशकों को बिना फिजिकल धातु खरीदे सोना-चांदी में निवेश का सरल और सुरक्षित रास्ता देते हैं।

म्यूचुअल फंड के जरिए सोना-चांदी में निवेश कैसे करें?

निवेशक मुख्य रूप से गोल्ड ETF और सिल्वर ETF के जरिए निवेश कर सकते हैं। ये ऐसे म्यूचुअल फंड होते हैं, जो सीधे फिजिकल सोने या चांदी में निवेश करते हैं। निवेशक को इसके बदले यूनिट्स मिलती हैं, जिनकी NAV बाजार में सोने-चांदी की कीमतों के अनुसार घटती-बढ़ती रहती है। इससे बिना धातु खरीदे कीमतों की तेजी का फायदा मिलता है।

ETF के अलावा कौन-से विकल्प मौजूद हैं?

ETF के अलावा फंड ऑफ फंड्स (FoF) और मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड भी विकल्प हैं। मल्टी-एसेट फंड में इक्विटी, डेट और सोना-चांदी का मिश्रण होता है। आमतौर पर 10 से 25 प्रतिशत निवेश कीमती धातुओं में किया जाता है। इसका फायदा यह है कि निवेशक को ऑटोमैटिक डायवर्सिफिकेशन और री-बैलेंसिंग मिलती है, हालांकि तेज तेजी के समय रिटर्न सीमित रह सकता है।

क्या SIP से सोना-चांदी म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं?

हां, निवेशक SIP, STP और एकमुश्त निवेश—तीनों तरीकों से निवेश कर सकते हैं। SIP के जरिए हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम लगाने से बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम हो जाता है। खास बात यह है कि म्यूचुअल फंड के जरिए सोना-चांदी में निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं होती।

सोना-चांदी म्यूचुअल फंड पर टैक्स नियम

  • गोल्ड/सिल्वर ETF:

    • 12 महीने से पहले बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स (इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार)

    • 12 महीने से ज्यादा होल्ड करने पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स

  • फंड ऑफ फंड्स (FoF):

    • 24 महीने से ज्यादा होल्डिंग पर 12.5% LTCG

    • 24 महीने से पहले बेचने पर स्लैब के अनुसार टैक्स

हालिया तेजी के बाद निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए?

पिछले एक साल में सोने ने करीब 73% और चांदी ने 161% का जबरदस्त रिटर्न दिया है। इतनी तेज तेजी के बाद विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि निवेशक एकमुश्त निवेश के बजाय गिरावट पर धीरे-धीरे खरीद की रणनीति अपनाएं।
एक्सपर्ट के मुताबिक कुल पोर्टफोलियो में सोना-चांदी का हिस्सा 10–15% तक सीमित रखना बेहतर है। इसमें लगभग 10% सोना स्थिरता के लिए और 3–5% चांदी ज्यादा जोखिम लेकिन ज्यादा रिटर्न की संभावना के तौर पर रखी जा सकती है।

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Author: Deepak Mittal

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