भारत का रहस्यमयी रेलवे स्टेशन! जहां न कोई नाम… न रविवार को बजती है ट्रेन की सीटी

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Deepak Mittal

 नई दिल्ली: भारत में भारतीय रेलवे के 7300 से ज्यादा स्टेशन हैं, लेकिन इनमें से एक स्टेशन ऐसा भी है, जो अपने अजीब नियम और रहस्यमयी पहचान के कारण चर्चा में रहता है। यह स्टेशन पूरी तरह से चालू है, यहां ट्रेन आती है, रुकती है… लेकिन इसका कोई आधिकारिक नाम नहीं है

यह अनोखा रेलवे स्टेशन पश्चिम बंगाल में स्थित है और बर्धमान शहर से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है। इंडियन रेलवे ने इस स्टेशन का निर्माण 2008 में किया था, लेकिन आज भी यह स्टेशन बिना नाम के चल रहा है।

 आखिर क्यों नहीं रखा गया स्टेशन का नाम?

इस स्टेशन का नाम न होने की वजह भी उतनी ही दिलचस्प है। दरअसल, यह स्टेशन बांकुड़ा–मासाग्राम रेलवे लाइन पर रैना और रैनानगर गांव के बीच स्थित है। स्टेशन के नाम को लेकर दोनों गांवों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है।

प्लेटफॉर्म के दोनों ओर लगे पीले रंग के खाली साइनबोर्ड आज भी इस विवाद की गवाही देते हैं। दोनों गांव चाहते हैं कि स्टेशन का नाम उनके गांव के नाम पर रखा जाए। इसी झगड़े के कारण रेलवे अब तक किसी नाम पर मुहर नहीं लगा पाया।

 दिन में सिर्फ 6 बार गुजरती है ट्रेन

इस स्टेशन से केवल बांकुड़ा–मासाग्राम कम्यूटर ट्रेन गुजरती है, जो दिन में छह बार यहां रुकती है। खास बात यह है कि जो यात्री पहली बार यहां उतरते हैं, वे अक्सर कन्फ्यूज हो जाते हैं। स्टेशन का नाम न होने के कारण उन्हें स्थानीय लोगों से पूछकर ही पता चलता है कि वे आखिर पहुंचे कहां हैं।

 कोर्ट में फंसा स्टेशन का नाम

स्टेशन मास्टर नबकुमार नंदी के हवाले से पहले बताया गया था कि स्टेशन का नाम रखने का मामला फिलहाल कोर्ट में लंबित है। स्थानीय लोगों ने रेलवे बोर्ड के फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिस वजह से स्टेशन आज भी बिना नाम के संचालित हो रहा है।

 रविवार को क्यों नहीं बजती ट्रेन की सीटी?

इस स्टेशन से जुड़ा एक और हैरान करने वाला नियम है। रविवार के दिन यहां ट्रेन का हॉर्न या सीटी नहीं बजती।
दरअसल, रविवार को इस स्टेशन पर कोई भी ट्रेन नहीं रुकती। स्टेशन मास्टर टिकट बेचने के लिए नए टिकट लेने बर्धमान शहर जाते हैं। इस वजह से रविवार को:

  • टिकट काउंटर बंद रहता है

  • कोई ट्रेन नहीं आती

  • न कोई अनाउंसमेंट होता है

  • न ही ट्रेन की सीटी या हॉर्न बजता है

पूरा स्टेशन एकदम शांत रहता है।

 टिकट पर आज भी लिखा है पुराना नाम

दिलचस्प बात यह है कि टिकटों पर आज भी स्टेशन का पुराना नाम ‘रैनागढ़’ ही छपा होता है। शुरुआत में स्टेशन का नाम रैनागढ़ रखा गया था, लेकिन नाम बदलने की मांग के बाद विवाद खड़ा हो गया और तब से यह स्टेशन बिना नाम के ही चल रहा है

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Author: Deepak Mittal

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