Dehradun News: संकट की घड़ी में देवदूत बनी 108 एंबुलेंस सेवा, 5 साल में लाखों जिंदगियों की बनी ढाल

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Deepak Mittal

देहरादून: राज्य की 108 इमरजेंसी सेवा बीते पांच वर्षों में स्वास्थ्य सुरक्षा की एक मजबूत और भरोसेमंद ढाल बनकर उभरी है। पर्वतीय, दुर्गम और मौसम की दृष्टि से अत्यंत चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों वाले प्रदेश में त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना हमेशा से कठिन रहा है, लेकिन 108 सेवा ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया है।

प्रशासनिक प्रतिबद्धता, आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित मानव संसाधन के बल पर 108 इमरजेंसी सेवा ने यह साबित कर दिया है कि संकट की घड़ी में समय पर पहुंचना ही जीवन बचाने की सबसे बड़ी कुंजी है।

संकट में जीवनरेखा बनी 108 सेवा

सड़क दुर्घटना, हृदयाघात, प्रसव संबंधी आपात स्थिति, गंभीर बीमारियां, प्राकृतिक आपदाएं या भीड़भाड़ वाले धार्मिक एवं राष्ट्रीय आयोजन—हर परिस्थिति में 108 सेवा 24×7 अलर्ट मोड में कार्य करती रही है।

बीते पांच वर्षों में सेवा का उद्देश्य केवल मरीज को अस्पताल पहुंचाना नहीं रहा, बल्कि गोल्डन ऑवर के भीतर गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक उपचार देकर जीवन रक्षा सुनिश्चित करना इसकी कार्यसंस्कृति का आधार बना।

वर्षवार आपात मामलों की तस्वीर

  • 2020-21: 1,06,768 आपात मामले

  • 2021-22: 1,58,070 मामले

  • 2022-23: 1,62,301 मामले

  • 2023-24: 1,51,276 मामले

  • 2024-25: 1,38,369 मामले

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि 108 सेवा पर आम जनता का भरोसा लगातार बना हुआ है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रिस्पॉन्स टाइम

  • 2020-21: 24.18 मिनट

  • 2021-22: 20.34 मिनट

  • 2024-25: 23.09 मिनट

शहरी इलाकों में और भी तेज पहुंच

  • 2020-21: 13.13 मिनट

  • 2021-22: 10.18 मिनट

  • 2024-25: 12.48 मिनट

कॉल वॉल्यूम और प्रभावी प्रबंधन

वर्ष 2020-21 में 108 सेवा को 10,11,047 कॉल्स प्राप्त हुईं, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक रहीं। कोविड महामारी के दौरान जानकारी, सहायता और आपात जरूरतों के चलते कॉल्स में भारी उछाल आया।

इसके बाद कॉल्स की संख्या में कमी आई, लेकिन 2024-25 में यह फिर बढ़कर 8,00,473 तक पहुंच गई, जो सेवा की निरंतर जरूरत और भरोसे को दर्शाता है।

तकनीकी नवाचार बना ताकत

108 सेवा में लागू आधुनिक कॉल ट्रायजिंग सिस्टम के तहत कॉल्स को गंभीरता के आधार पर प्राथमिकता दी जाती है।
इसके साथ ही:

  • GPS आधारित एंबुलेंस ट्रैकिंग

  • डिजिटल डेटा रिकॉर्डिंग

  • रियल-टाइम मॉनिटरिंग

ने सेवा को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बना दिया है।

भविष्य की तैयारी

पिछले पांच वर्षों के आंकड़े यह साबित करते हैं कि 108 इमरजेंसी सेवा ने हर चुनौती का सामना मजबूती और संवेदनशीलता के साथ किया है।
आने वाले समय में फोकस रहेगा—

✔️ ग्रामीण व दुर्गम क्षेत्रों में रिस्पॉन्स टाइम सुधारने पर
✔️ तकनीकी संसाधनों के उन्नयन पर
✔️ मानव संसाधन क्षमता को और मजबूत करने पर

108 सेवा आज सिर्फ एक एंबुलेंस सेवा नहीं, बल्कि हर नागरिक के लिए जीवन की उम्मीद बन चुकी है।

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Author: Deepak Mittal

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