बालोद/रायपुर,,छत्तीसगढ़ी भाषा, संस्कृति और क्षेत्रीय साहित्य को राष्ट्रीय मंच पर मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में कवित्री गायत्री साहू “शिवांगी” ने राजधानी रायपुर में आयोजित साहित्यिक सम्मेलनों और सम्मान समारोहों में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराते हुए पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया।

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं संस्कृति विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस महत्वपूर्ण राज्यस्तरीय साहित्यिक सम्मेलन में प्रदेशभर के रचनाकारों की मौजूदगी के बीच छत्तीसगढ़ी साहित्य पर सारगर्भित विमर्श हुआ। कार्यक्रम में कुल 13 पुस्तकों का विमोचन किया गया, वहीं संविधान की 8वीं अनुसूची में छत्तीसगढ़ी भाषा को शामिल करने की मांग पुनः प्रबल स्वर में उठी।
सम्मेलन में प्रमुख अतिथि के रूप में संस्कृति मंत्री, विभिन्न जनप्रतिनिधियों व वरिष्ठ साहित्यकारों ने छत्तीसगढ़ी साहित्य के संवर्धन में कवित्री गायत्री साहू “शिवांगी” समेत कई रचनाकारों के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया। कार्यक्रम के दौरान “शिवांगी” को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक कार्यों व निरंतर सक्रिय सांस्कृतिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
इधर बालोद जिले में भी आयोजित साहित्य सम्मान समारोहों में गायत्री साहू “शिवांगी” मुख्य आकर्षण रहीं। विभिन्न मंचों पर उन्हें पुष्पगुच्छ, सम्मान-पत्र व शॉल देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रमों में उपस्थित वरिष्ठ कवियों, साहित्यप्रेमियों व अतिथियों ने उनकी रचनाओं को छत्तीसगढ़ी साहित्य की गरिमा बढ़ाने वाला बताया।

समारोहों में “शिवांगी” ने अपनी काव्य-प्रस्तुतियों से मंच को जीवंत करते हुए छत्तीसगढ़ी भाषा की समृद्धि, सांस्कृतिक गहराई और साहित्यिक विरासत को प्रभावशाली स्वर में अभिव्यक्त किया। उनकी प्रस्तुतियों को श्रोताओं ने खूब सराहा।
कार्यक्रमों में जिले के अन्य साहित्यकार भी शामिल हुए और क्षेत्रीय साहित्य की वर्तमान स्थिति व भविष्य की दिशा पर अपने विचार साझा किए।
छत्तीसगढ़ी साहित्य की उभरती आवाज के रूप में कवित्री गायत्री साहू “शिवांगी” का यह सम्मान पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण है। उनके योगदान से छत्तीसगढ़ी साहित्य को नई ऊर्जा और व्यापक पहचान मिल रही है।
Author: Deepak Mittal









Total Users : 8202404
Total views : 8240854