2025 का सबसे बड़ा सौर ज्वाला, उपग्रह संचालन और बिजली ग्रिड पर खतरे की आशंका
नई दिल्ली। सूर्य ने 11 नवंबर को वर्ष 2025 का अब तक का सबसे शक्तिशाली सौर विस्फोट (Solar Flare) किया, जिससे पृथ्वी के वायुमंडल में झटके महसूस किए गए और दुनिया के कई हिस्सों में संचार व्यवस्था प्रभावित हुई। यह X5.1 श्रेणी का सौर ज्वाला सूर्य के सक्रिय सौर धब्बे AR4274 से भारतीय समयानुसार सुबह करीब 10 बजे (5:00 EST) फूटा। इस विस्फोट के कारण अफ्रीका और यूरोप के सूर्यप्रकाश वाले हिस्सों में गंभीर रेडियो ब्लैकआउट दर्ज किया गया।
यह ज्वाला सूर्य पर हाल ही में जारी तीव्र गतिविधियों की श्रृंखला का हिस्सा है। इससे पहले 9 और 10 नवंबर को क्रमशः X1.7 और X1.2 श्रेणी के सौर ज्वाले फूट चुके हैं। दोनों ने कोरोनल मास इजेक्शन (CME) उत्पन्न किए हैं — यानी सूर्य से निकला विशाल प्लाज्मा और चुंबकीय ऊर्जा का बादल — जो पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ताज़ा X5.1 विस्फोट से उत्पन्न CME अगर सीधे पृथ्वी की ओर आया है, तो यह एक “कैनिबल CME” (जब दो CME टकराकर और शक्तिशाली बन जाते हैं) का रूप ले सकता है।
पूर्वानुमान के अनुसार, 12 नवंबर को दो CME पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकरा सकते हैं, जिससे G3-स्तर का भू-चुंबकीय तूफान (Geomagnetic Storm) पैदा होने की संभावना है। ऐसे तूफान उपग्रह संचालन, बिजली ग्रिड, और रेडियो संचार को बाधित कर सकते हैं। साथ ही, यह ध्रुवीय क्षेत्रों से कहीं आगे तक ऑरोरा (उत्तरी रोशनी) जैसी अद्भुत दृश्य घटनाएँ भी उत्पन्न कर सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सौर गतिविधि सौर चक्र 25 के चरम चरण की ओर संकेत कर रही है, जब सूर्य पर धब्बों और विस्फोटों की संख्या बढ़ जाती है। इस तरह की घटनाएँ आधुनिक तकनीकी ढांचे — जैसे उपग्रह संचार, नेविगेशन सिस्टम और विद्युत नेटवर्क — के लिए चुनौती बन सकती हैं।
हालांकि वैज्ञानिकों ने कहा है कि पृथ्वी पर इसका प्रभाव सीमित भी रह सकता है, फिर भी वैश्विक अंतरिक्ष एजेंसियाँ, उपग्रह ऑपरेटर और पावर ग्रिड प्रबंधक उच्च सतर्कता पर हैं। यह घटना याद दिलाती है कि अंतरिक्ष मौसम की निगरानी और तैयारी आधुनिक युग की तकनीकी सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
Author: Deepak Mittal










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