जापान के इस ऐलान से भारत की बल्ले-बल्ले, अमेरिका ही नहीं, चीन और पाकिस्तान के भी छूटेंगे पसीने, जानें मामला

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टोक्यो: भारत और जापान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में तत्काल सुधार की मांग की है। इसके अलावा दोनों ही देशों ने एक दूसरे की सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का समर्थन भी किया है।

यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान की गई है। पीएम मोदी जापान के बाद चीन दौरे पर जाने वाले हैं। ऐसे में भारत और जापान की इस मांग को काफी अहम माना जा रहा है, क्यों वह चीन ही है, जिसने यूएनएससी में सुधारों और इन दोनों देशों की सदस्यता का विरोध किया है। वहीं, अमेरिका भी अंदरखाने यूएनएससी में सुधारों का विरोध करता है, ताकि किसी दूसरे देश को वीटो शक्ति प्राप्त न हो।

संयुक्त घोषणापत्र में क्या लिखा है

भारत और जापान के संयुक्त घोषणापत्र में कहा गया है कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तत्काल सुधार के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया है। इसमें वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करने के लिए स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों का विस्तार शामिल है। उन्होंने यूएनएससी सुधारों में तेजी लाने, विशेष रूप से अंतर-सरकारी वार्ता ढांचे के अंतर्गत एक निश्चित विषय पर बातचीत को शुरू करने और एक निश्चित समय-सीमा में ठोस परिणाम प्राप्त करने के अपने दृढ़ संकल्प को भी व्यक्त किया।भारत-जापान ने एक दूसरे का किया समर्थन

घोषणापत्र में यह भी कहा गया है कि भारत और जापान के प्रधानमंत्रियों ने एक सुधारित यूएनएससी में स्थायी सीट के लिए एक-दूसरे की उम्मीदवारी के लिए अपना पारस्परिक समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने बदलती दुनिया में वैश्विक शासन में योगदान देने वाले संयुक्त राष्ट्र की दक्षता और प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया।यूएनएससी सुधार लंबित क्यों है

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की प्रक्रिया में यूएन चार्टर में संशोधन शामिल है, जिसके लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत और सुरक्षा परिषद के सभी स्थायी सदस्यों (P5) सहित दो-तिहाई सदस्य देशों के समर्थन की आवश्यकता होती है। सुधार के प्राथमिक उद्देश्य परिषद की प्रभावशीलता और वैधता को बढ़ाना है, लेकिन विभिन्न देशों के अलग-अलग दृष्टिकोणों के कारण प्रगति धीमी है। जी-4 समूह (भारत, जापान, ब्राजील, जर्मनी) स्थायी सदस्यता बढ़ाने का समर्थन करता है, जबकि यूनाइटिंग फॉर कंसेन्सस (UfC) समूह नए स्थायी सदस्य न जोड़कर अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव देता है।

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Author: Deepak Mittal

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