बालोद/कुसुमकसा, 8 अगस्त 2025
बालोद जिले की डौंडी तहसील अंतर्गत ग्राम कुसुमकसा इन दिनों सार्वजनिक भूमि पर हो रहे अवैध अतिक्रमण को लेकर सुर्खियों में है। जहां एक ओर शासन और प्रशासन द्वारा स्वच्छता, विकास और कानून व्यवस्था की मजबूती की बात की जा रही है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत क्षेत्र में वर्षों से कुछ सार्वजनिक स्थानों पर व्यक्तिगत उपयोग के लिए ढांचे खड़े कर लिए गए हैं। इस विषय को कई बार अखबारों और सामाजिक मंचों पर उठाया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस और निर्णायक कार्रवाई नहीं हो पाई है।
प्रशासन ने शुरू की जांच, लेकिन समाधान अभी दूर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रशासन द्वारा कुछ मामलों में दस्तावेजों की जांच प्रारंभ की गई है और संबंधित व्यक्तियों से पक्ष भी मांगा गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि मामला अब केवल प्रशासनिक न होकर कानूनी और दस्तावेजी स्तर पर विचाराधीन है।
ग्रामीणों का मानना है कि सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण न केवल ग्राम की योजनाओं और विकास कार्यों को प्रभावित करता है, बल्कि भविष्य में किसी भी सामुदायिक उपयोग के लिए संसाधनों की कमी भी पैदा कर सकता है।
जनता की मांग – निष्पक्ष जांच और शीघ्र कार्रवाई
ग्रामीणों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि वे निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के माध्यम से शीघ्र समाधान सुनिश्चित करें। ग्रामीण यह भी चाहते हैं कि सभी पक्षों को उचित अवसर प्रदान किया जाए और कानूनी प्रक्रिया का पूर्ण पालन हो।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और अगला कदम
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर शासन के दिशा-निर्देश स्पष्ट हैं। इन दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और पंचायत स्तर के अधिकारियों से भी सहयोग की अपेक्षा की जा रही है ताकि जनहित से जुड़ी योजनाओं को बिना रुकावट आगे बढ़ाया जा सके।
जन-प्रशासन सहयोग ही बनेगा समाधान की कुंजी
इस पूरे मामले में स्पष्ट है कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई ही नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज और प्रशासनिक तंत्र के बीच सहयोग से ही स्थायी समाधान संभव है। शासन की मंशा है कि कोई भी व्यक्ति या संस्था कानून से ऊपर न हो, और सभी निर्णय न्यायसंगत, संवेदनशील तथा सुसंगत प्रक्रिया के अनुरूप लिए जाएं।

Author: Deepak Mittal
