पीसीओएस और पीसीओडी के प्रबंधन में योग बना संजीवनी, तनाव घटाएं और हार्मोन संतुलित करें

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Deepak Mittal

दुर्ग, 8 अगस्त 2025
आज की तेज़ रफ़्तार और तनावपूर्ण जीवनशैली में महिलाएं तेजी से हार्मोनल असंतुलन जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रही हैं, जिनमें पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) और पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिज़ीज़ (PCOD) प्रमुख हैं। ये स्थितियां अनियमित मासिक धर्म, मुंहासे, वजन बढ़ना, बालों का झड़ना और यहां तक कि गर्भधारण में कठिनाई जैसी समस्याएं उत्पन्न कर सकती हैं।

इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में योग एक प्राकृतिक और प्रभावशाली उपाय के रूप में उभर रहा है। योग न केवल तनाव को कम करता है बल्कि शरीर में हार्मोन के संतुलन को बनाए रखने में भी सहायता करता है।

योग से पीसीओएस/पीसीओडी नियंत्रण: योग गुरु रश्मि शुक्ला का मार्गदर्शन

योग गुरु रश्मि शुक्ला, जो कि मीनाक्षी नगर, दुर्ग से जुड़ी हैं, बताती हैं कि यदि नियमित रूप से सही योगासनों का अभ्यास किया जाए तो पीसीओएस और पीसीओडी जैसी समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

उनके अनुसार, निम्नलिखित योगासन विशेष रूप से लाभदायक हैं:

???? बद्धकोणासन (Butterfly Pose)
यह आसन पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार को बढ़ाता है और मासिक धर्म चक्र को नियमित करने में सहायक होता है।

???? भुजंगासन (Cobra Pose)
यह पेट और प्रजनन अंगों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है तथा थायरॉइड ग्रंथि को सक्रिय करता है, जिससे हार्मोन संतुलन में मदद मिलती है।

???? उष्ट्रासन (Camel Pose)
यह शरीर को खोलता है और एंडोक्राइन सिस्टम (हार्मोन तंत्र) को सक्रिय करता है। यह तनाव को भी कम करता है।

???? वक्रासन (Spinal Twist Pose)
यह पाचन क्रिया और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है, जिससे शरीर की आंतरिक सफाई बेहतर होती है।

योग: केवल आसन नहीं, जीवनशैली का परिवर्तन

योग गुरु रश्मि शुक्ला यह भी कहती हैं कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है। नियमित ध्यान, प्राणायाम और संतुलित आहार के साथ मिलकर यह समस्याओं की जड़ पर काम करता है।

उनका मानना है कि मानसिक तनाव पीसीओएस/पीसीओडी का एक बड़ा कारण है और योग इसे नियंत्रित करने का सबसे सशक्त साधन है।

“हर महिला को अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए और नियमित योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। यह सिर्फ शरीर के लिए नहीं, बल्कि मन और आत्मा के लिए भी संजीवनी है।” – योग गुरु रश्मि शुक्ला

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Author: Deepak Mittal

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