75 दिनों की आस्था यात्रा: बस्तर दशहरा पाट जात्रा से हुआ प्रारंभ
दीपक मित्तल प्रधान संपादक छत्तीसगढ़
रायपुर, 24 जुलाई 2025।
हरियाली अमावस्या के दिन बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी मंदिर परिसर में पारंपरिक पाट जात्रा अनुष्ठान के साथ विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा की विधिवत शुरुआत हो गई।
इस मौके पर बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष, क्षेत्रीय विधायक, महापौर सहित समिति से जुड़े पारंपरिक पदाधिकारी—मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी-गायता, नाईक-पाईक, सेवादार और बड़ी संख्या में स्थानीय जनसमुदाय ने उत्सव में सहभागिता की।
पाट जात्रा में रथ निर्माण हेतु ठुरलू खोटला और अन्य पारंपरिक औजारों की पूजा की गई। इसी के साथ 75 दिनों तक चलने वाले इस आस्था और लोकपरंपरा से भरपूर महापर्व की शुरुआत हुई।
आने वाले प्रमुख पूजा विधान की तिथियां:
05 सितम्बर: डेरी गड़ाई
21 सितम्बर: काछनगादी
22 सितम्बर: कलश स्थापना
23 सितम्बर: जोगी बिठाई
24–29 सितम्बर: नवरात्रि पूजा और रथ परिक्रमा
29 सितम्बर: बेल पूजा
30 सितम्बर: महाअष्टमी और निशा जात्रा
01 अक्टूबर: कुंवारी पूजा, जोगी उठाई, मावली परघाव
02 अक्टूबर: भीतर रैनी
03 अक्टूबर: बाहर रैनी
04 अक्टूबर: काछन जात्रा, मुरिया दरबार
05 अक्टूबर: कुटुम्ब जात्रा (ग्राम देवी-देवताओं की विदाई)
07 अक्टूबर: मावली माता की डोली विदाई — समापन
बस्तर दशहरा न केवल छत्तीसगढ़ की संस्कृति का प्रतीक है, बल्कि यह जनआस्था, परंपरा और सामाजिक समरसता का महोत्सव भी है। यह अनूठा पर्व भारत में अपनी तरह का एकमात्र आयोजन है, जो देवी आराधना के साथ-साथ जनजातीय परंपराओं, जनभागीदारी और सामाजिक एकता को समर्पित है।
Author: Deepak Mittal










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