निर्मल अग्रवाल ब्यूरो प्रमुख मुंगेली 8959931111
मुंगेली-भरे दोपहरी में सोशल मीडिया प्रचारक एवं यूट्यूबर कोमल देवांगन ने समाजसेवा और मानवता का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया जब कोमल ने जरूरतमंद व्यक्ति के लिए रक्तदान कर एक सकारात्मक संदेश दिया।
रक्तदान के बाद कोमल देवांगन ने अपने विचार साझा करते हुए कहा, “रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं होता, इसलिए इसे महादान कहा गया है। यह न केवल किसी जरूरतमंद की जान बचाता है, बल्कि स्वयं रक्तदाता की सेहत को भी बेहतर बनाता है।” उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक के इस युग में जहाँ लगभग हर समस्या का समाधान खोज लिया गया है, वहीं रक्त का कोई विकल्प आज तक नहीं बन पाया है। यदि ब्लड बैंक में पर्याप्त मात्रा में रक्त संग्रहित रहेगा, तभी संकट की घड़ी में जरूरतमंदों की सहायता की जा सकेगी।
कोमल देवांगन ने यह भी बताया कि रक्तदान से शरीर में नए रक्तकोष (ब्लड सेल्स) का निर्माण होता है, जिससे शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति पहले से अधिक स्वस्थ महसूस करता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नियमित रूप से रक्तदान करें और इसे एक सामाजिक कर्तव्य के रूप में अपनाएं।
समाजसेवा के प्रति समर्पण का उदाहरण
कोमल देवांगन जिले के उभरते हुए युवा समाजसेवियों के रूप में पूरी लगन के साथ अपना काम करते है, जो सोशल मीडिया के माध्यम से न केवल जनजागरण का कार्य कर रहे हैं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे समय-समय पर स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण जैसे विषयों पर कार्यशालाएं और जागरूकता अभियान चलाते रहे हैं।
रक्तदान की यह पहल भी उनके इसी सेवा-भाव की एक कड़ी है, जिससे समाज में एक नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार हुआ है। शहर के युवाओं ने भी कोमल देवांगन की इस पहल की सराहना करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर “#रक्तदान_महादान” हैशटैग के साथ इसे व्यापक रूप से साझा किया।
जरूरतमंद परिवार की भावुक प्रतिक्रिया
रक्त प्राप्त करने वाले मरीज के परिजनों ने भावुक होते हुए कहा, “जब हमें किसी से उम्मीद नहीं थी, तब कोमल जी देवदूत बनकर सामने आए। हम उनके इस सहयोग को कभी नहीं भूल पाएंगे।” यह शब्द उस आत्मीयता और कृतज्ञता को दर्शाते हैं जो मानव सेवा के प्रत्येक कार्य में झलकती है।
कोमल देवांगन का यह कार्य न केवल एक जीवन बचाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने समाज को यह संदेश भी दिया कि अगर हम सब मिलकर छोटी-छोटी जिम्मेदारियों को समझें और निभाएं, तो कोई भी समाज पीछे नहीं रह सकता।
Author: Deepak Mittal








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