अवैध रेत खनन पर हाईकोर्ट का हंटर! – माफियाओं को सरकारी संरक्षण? कब जागेगा प्रशासन?

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सिर्फ जुर्माने से नहीं रुकेगा रेत माफिया का आतंक, हाईकोर्ट ने सरकार से किया कड़ा सवाल…

शैलेश शर्मा 9406308437नवभारत टाइम्स 24×7.in जिला ब्यूरो रायगढ़

*रायगढ़ ।* छत्तीसगढ़ में अवैध रेत खनन का गोरखधंधा अपने चरम पर पहुंच चुका है। माफिया नदियों का सीना छलनी कर करोड़ों की कमाई कर रहे हैं, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। इस गंभीर स्थिति पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में पूछा कि जब माइनिंग एक्ट में कठोर दंड का प्रावधान है, तो अवैध खनन में लिप्त लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? आखिर कब तक सिर्फ जुर्माना लगाकर तस्करों को बचने का मौका दिया जाता रहेगा?

माफियाओं की मौज, सरकार की चुप्पी पर सवाल :

हाईकोर्ट ने कहा कि रेत माफिया सरकार की ढीली नीतियों का पूरा फायदा उठा रहे हैं। वे भारी मात्रा में अवैध रेत खनन कर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं और जब पकड़े जाते हैं, तो आसानी से जुर्माना भरकर छूट जाते हैं। कोर्ट ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सरकार केवल दिखावटी कार्रवाई कर रही है? क्या प्रशासन की निष्क्रियता से माफियाओं को खुली छूट मिल गई है?

माइनिंग एक्ट का पालन क्यों नहीं किया जा रहा? :

हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अवैध रेत खनन की समस्या तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती। केवल आर्थिक दंड लगाकर उन्हें छोड़ना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि अगर अवैध खनन को रोकना है, तो दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करनी होगी।

राज्य सरकार का जवाब – कागजी कार्रवाई तक सीमित :

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि चार सदस्यीय टीम गठित की गई है, जो अन्य राज्यों का दौरा कर रेत खनन रोकने के उपायों पर रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके अलावा, अरपा नदी में प्रदूषण रोकने के लिए पुणे की एक कंपनी से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करवाई जा रही है।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इस पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि सिर्फ जांच कमेटी बनाने और रिपोर्ट तैयार करने से अवैध खनन नहीं रुकेगा। जब तक प्रशासनिक स्तर पर ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक माफिया नदियों को बर्बाद करते रहेंगे।

अब FIR दर्ज करने का आदेश, रेत तस्करी को संज्ञेय अपराध घोषित करने की मांग :

सरकार ने अदालत को जानकारी दी कि अब अवैध रेत खनन और परिवहन करने वालों पर FIR दर्ज की जा रही है तथा मोटर व्हीकल एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। हाईकोर्ट ने इस पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि रेत तस्करी को संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) घोषित किया जाना चाहिए, ताकि दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो सके और वे आसानी से बच न पाएं।

पूरे प्रदेश में सख्त निगरानी के आदेश – निर्दोषों की जान पर बन रही है :

हाईकोर्ट ने कहा कि अवैध रेत खनन के कारण कई निर्दोषों की जान जा चुकी है। हाल ही में तीन मासूम बच्चियों की मौत इस समस्या की भयावहता को दर्शाती है। अदालत ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि अरपा नदी सहित पूरे प्रदेश में अवैध खनन पर सख्ती से निगरानी रखी जाए और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए।

22 अप्रैल तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो सरकार पर गिरेगी गाज :

हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि अब सिर्फ औपचारिक कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी, तब तक सरकार को ठोस रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। यदि सरकार और प्रशासन इस मामले में ढील बरतते हैं, तो अदालत कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।

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