जे के मिश्र,ब्यूरो चीफ
नवभारत टाइम्स24*7in
बिलासपुर
बिलासपुर – सरकंडा के मोपका इलाके में सरकारी जमीन, जिसे पटवारी कार्यालय के लिए आरक्षित किया गया था, पर नियमों की अनदेखी करते हुए दुकानें बनाई गईं। स्थानीय लोगों ने ग्राम पंचायत और नगर निगम प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा है कि इन दुकानों का आवंटन नियमों के खिलाफ चहेते लोगों को किया गया है। अफसरों का कहना है कि शिकायत मिलने पर मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप
मोपका इलाके में सड़क किनारे मौजूद सरकारी भूमि को पटवारी कार्यालय के लिए आरक्षित किया गया था। लेकिन ग्राम पंचायत ने इस भूमि पर दुकानें बनाने का प्रस्ताव पारित कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया। निर्माण के दौरान कोर्ट ने स्टे आदेश जारी किया, जिससे काम रोक दिया गया।
सत्ता परिवर्तन के बाद बढ़ी मनमानी
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद, इस क्षेत्र को परिसीमन के जरिए नगर निगम के अंतर्गत लाया गया। निगम प्रशासन ने कोर्ट से स्टे हटवाकर निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया और दुकानें बनाकर अपने करीबी लोगों को सस्ती दरों पर आवंटित कर दीं।
स्थानीय लोगों की नाराजगी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पटवारी कार्यालय के लिए आरक्षित भूमि का इस तरह से व्यवसायिक उपयोग करना प्रशासन की मनमानी को दर्शाता है। उनका आरोप है कि पंचायत और निगम के अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को फायदा पहुंचा रहे हैं।
निगम ने दी सफाई
इस मामले पर जोन कमिश्नर का कहना है कि यह जमीन पहले पंचायत के अधीन थी, और पंचायत ने दुकान निर्माण कार्य शुरू कराया था। निगम में शामिल होने के बाद इन जर्जर दुकानों की मरम्मत कराई गई। पटवारी कार्यालय के लिए जमीन आरक्षित होने की जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने बताया कि मामले की गहन जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
निष्कर्ष
इस घटना ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और स्थानीय लोगों को न्याय मिलता है या नहीं।
Author: Deepak Mittal










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