3 साल की बाघिन पर टूटा इंसानों का कहर, पीट-पीटकर किया अंधा

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Assam News: असम के नागौन जिले के एक गांव में बुधवार को एक तीन साल की रॉयल बंगाल बाघिन पर गांववासियों ने बर्बर हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई और लगभग पूरी तरह से उसकी आंखों की रोशनी चली गई. विशेषज्ञों का मानना है कि बाघिन को पूरी जिंदगी कैद में बितानी पड़ सकती है क्योंकि उसकी आंखों की चोट इतनी गंभीर है कि वह जंगली जीवन में वापस नहीं लौट पाएगी.

गांव वालों का बर्बर हमला, इंसानियत शर्मसार

हैरानी की बात ये है कि यह बाघिन पिछले कुछ दिनों से उस इलाके में दिखाई दे रही थी और कुछ गांववाले इसे अच्छी बाघिन कह रहे थे क्योंकि उसने ना तो किसी गांव वाले और न ही किसी मवेशी को अपना निशाना बनाया था. हालांकि, जुलाई में आई बाढ़ के बाद गांव के आसपास बाघों की गतिविधियों में वृद्धि हुई थी, जिससे लोगों में डर बढ़ गया था. रेंजर बिभूति मजूमदार के अनुसार, बाढ़ के बाद जंगली जानवरों का गांवों की ओर आना बढ़ गया था, जिससे ग्रामीणों में तनाव बढ़ गया था.

जान बचाने के लिए नदी में कूदी बाघिन

बाघिन पर हमला उस समय हुआ जब वह गांव के पास थी. सैकड़ों ग्रामीणों ने उसे पत्थरों और लकड़ियों से घेर लिया और बुरी तरह हमला किया. इस हिंसक हमले से बचने के लिए बाघिन ने नदी में कूदकर जान बचाने की कोशिश की, लेकिन हमला इतना तीव्र था कि उसे गंभीर चोटें आईं. 17 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद वनकर्मियों ने बाघिन को बचाया और उसे तत्काल इलाज के लिए काजीरंगा के सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ रिहैबिलिटेशन एंड कंजरवेशन (CWRC) भेजा.

आंखों में आई गंभीर चोट
CWRC के प्रभारी डॉ. भास्कर चौधरी ने पुष्टि की कि बाघिन की दोनों आंखों को गंभीर नुकसान हुआ है. उन्होंने बताया, ‘बाएं आंख का पूरी तरह से नुकसान हो गया है और सिर व आंतरिक हिस्सों में भी चोटें आई हैं.’ डॉ. चौधरी ने कहा कि अगर आंखों की चोट ठीक नहीं होती, तो यह बाघिन के लिए जंगली में लौटना असंभव हो जाएगा. ऐसे में बाघिन को सारी उम्र कैद में बितानी होगी जो उसके लिए एक कष्टदायक जीवन हो सकता है.

ग्रामीणों के खिलाफ शिकायत दर्ज
इस जघन्य हमले के बाद वन विभाग ने ग्रामीणों के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज की है और हमलावरों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं. पुलिस ने हमले में शामिल नौ व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है. इस घटना ने पूरे राज्य में वन्यजीवों के प्रति लोगों की संवेदनशीलता पर सवाल उठाया है और यह दिखाया है कि ऐसी घटनाएं जंगली जानवरों के साथ लोगों के संघर्ष को और बढ़ा सकती हैं.

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Author: Deepak Mittal

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