खाद्य विभाग में भ्रष्टाचार की खबरों से बौखलाए अधिकारी, जांच के बजाय भेज रहे नोटिस: आधी रात को राशन कार्ड बनाने वाले कर्मचारी को क्यों नहीं दे देते अवॉर्ड?

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जे के मिश्र/ बिलासपुर – जिले के खाद्य विभाग में चल रही गड़बड़ियों की खबरें प्रकाशित करना अब अधिकारियों के लिए असहनीय हो गया है। विभाग में फैले भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की पोल खोलने पर अधिकारी अब खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकारों पर नोटिस भेजने का सिलसिला शुरू कर चुके हैं। जनता के हितों की आवाज़ उठाना जैसे अपराध हो गया है। विभाग में हो रही अनियमितताओं की ओर ध्यान देने के बजाय, अधिकारी मामले को दबाने की कोशिश में लगे हैं।

राशन कार्ड बनाने में रात के अंधेरे का खेल

खाद्य विभाग में भ्रष्टाचार की खबरें लंबे समय से सामने आ रही हैं। इसके बावजूद, अधिकारियों द्वारा कार्रवाई करने के बजाय, दोषी कर्मचारियों को संरक्षण दिया जा रहा है। दिन के उजाले में जिन लोगों के राशन कार्ड नहीं बन पा रहे हैं, उन्हें आधी रात में खास कर्मचारियों की मदद से राशन कार्ड मिल जाते हैं। यही नहीं, नाम जोड़ने का काम भी धड़ल्ले से जारी है, जबकि आम आदमी अपने छोटे-छोटे कामों के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहा है और शिकायत लेकर कलेक्टर के जनदर्शन में जाने पर मजबूर हो रहा है।

जांच के नाम पर ली छुट्टी

राशन कार्ड बनाने के इस खेल के बारे में जब खाद्य नियंत्रक अनुराग भदौरिया से पूछा गया, तो उन्होंने मामले की जांच करने का आश्वासन दिया, लेकिन फिर छुट्टी पर चले गए। वापस लौटने के बाद न तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया और न ही किसी जांच की शुरुआत की। जब कलेक्टर अवनीश शरण से इस विषय पर बात की गई, तो उन्होंने भी पूरी जिम्मेदारी खाद्य अधिकारी पर डाल दी। इसके बाद से खाद्य अधिकारी रूपेंद्र बंजारे, जो राशन कार्ड शाखा के प्रभारी हैं, पर लगातार मेहरबानी बरसाई जा रही है। भ्रष्टाचार की खबरें उजागर करने वालों को नोटिस भेजकर उन्हें दबाने की कोशिश की जा रही है, जबकि असली गुनहगारों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का खेल

हाल के महीनों में खाद्य विभाग में गड़बड़ियों के कई मामले सामने आए हैं। इसके बावजूद, अधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार की सख्त कार्रवाई नहीं की गई। उलटे, भ्रष्टाचारियों को सुरक्षा देकर अनियमितताओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस तरह की स्थिति में, अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठना लाज़मी है। भाजपा जब सत्ता में आई थी, तो उन्होंने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की बात कही थी, लेकिन अब स्थिति यह हो गई है कि न तो कोई जांच हो रही है और न ही अनियमितताओं पर कोई अंकुश लगाया जा रहा है।

आवाज उठाने वालों पर हंटर चलाने की तैयारी

अधिकारियों को अगर आधी रात में राशन कार्ड बनाने वाले अपने कर्मचारियों पर इतना ही भरोसा है, तो उन्हें ईमानदारी का अवॉर्ड दे देना चाहिए। लेकिन, भ्रष्टाचार की जांच करने के बजाय, वे उन पर कार्रवाई कर रहे हैं जो इन जीबी गड़बड़ियों को उजागर कर रहे हैं। यह स्थिति साफ दर्शाती है कि विभाग पूरी तरह से भ्रष्टाचार की गिरफ्त में है और अधिकारी इसमें पर्दा डालने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।

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Author: Deepak Mittal

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