इस राज्य में  पहली बार शुरू हो रहा ‘रोड टू स्कूल’ प्रोजेक्ट..

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प्राथमिक शिक्षा के कायाकल्प में लगातार काम कर रही योगी सरकार कॉरपोरेट सेक्टर के सहयोग से शिक्षा व्यवस्था को और भी सुदृढ़ कर रही है। कॉरपोरेट के सामाजिक उत्तरदायित्व निधि से जहां कई विद्यालय अत्याधुनिक संसाधनों से संपन्न होकर स्मार्ट बने हैं।

तो वहीं अब प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कम्पोजिट विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने, ड्राप आउट रोकने, बच्चों में पठन पाठन के प्रति अभिरुचि बढ़ाने, उनके स्वास्थ्य देखभाल और उन्हें खेल एवं कौशल के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए भी संजीदगी से प्रयास हो रहे हैं।

परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक इस काम तो कर ही रहे हैं, अब इसमें कॉरपोरेट सेक्टर ने भी दिलचस्पी दिखाई है। इसी क्रम में प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में योगी सरकार के प्रयासों के मुरीद हुए हिंदुजा ग्रुप ने बच्चों के समग्र विकास के लिए ‘रोड टू स्कूल’ को यूपी में भी शुरू किया है। इसका औपचारिक शुभारंभ 20 अगस्त को गोरखपुर के चरगांवा ब्लॉक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे।

बड़े औद्योगिक घराने हिंदुजा ग्रुप की इकाई अशोक लीलैंड लिमिटेड ने अपने कार्यान्वयन भागीदारी लर्निंग लिंक फाउंडेशन के साथ मिलकर ‘रोड टू स्कूल’ प्रोजेक्ट में प्रथम चरण में गोरखपुर के चरगांवा ब्लॉक के सभी 78 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कम्पोजिट विद्यालयों को सम्मिलित किया है। इस ब्लॉक में प्रोजेक्ट के तहत काम शुरू भी हो चुका है। चरगांवा ब्लॉक में रोड टू स्कूल प्रोजेक्ट का फायदा कक्षा एक से आठ तक के 17781 छात्रों को मिलेगा।

जबकि दूसरे चरण में भटहट ब्लॉक के सभी 90 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कम्पोजिट विद्यालयों को शामिल किया जाएगा। दूसरे चरण में 16434 छात्र लाभान्वित होंगे। अशोक लीलैंड लिमिटेड और लर्निंग लिंक फाउंडेशन के इस साझा पहल को उत्तर प्रदेश में पहली बार लागू किया जा रहा है। तमिलनाडु समेत दक्षिण भारत के कुछ राज्यों और कश्मीर में इसके सफल परिणाम आए हैं।

रोड टू स्कूल सरकारी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कम्पोजिट विद्यालयों के छात्रों के बीच सीखने के अंतराल के मुद्दों पर कार्य करता है। इसमें छात्रों के समग्र विकास के लिए एक आधारभूत ढांचा तैयार करने पर खासा जोर है। रोड टू स्कूल में एक ऐसे मापनयोग्य मॉडल पर काम किया जाता है जिससे बच्चों के शैक्षिक और सह शैक्षिक, दोनों के विकास के साथ विद्यालय में उनकी उपस्थिति में सुधार किया जा सके और ड्राप आउट की समस्या दूर हो सके।

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Author: Deepak Mittal

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