एक दिवसीय बाल अधिकार संरक्षण कार्यशाला का हुआ आयोजन

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जिले के स्कूल के संस्था प्रमुखों से आरटीई एक्ट 2009 के अनुच्छेद 17 विषय पर की गई विस्तृत चर्चा

गुण्डरदेही : जिला शिक्षा अधिकारी बालोद एवं जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान दुर्ग के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय बाल अधिकार संरक्षण कार्यशाला का आयोजन आज जिला पंचायत बालोद के सभागार में किया गया। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग नई दिल्ली के प्रयोजन में आयोजित इस कार्यशाला में जिले के स्कूलों के संस्था प्रमुखों से आरटीई एक्ट 2009 के तहत विस्तृत चर्चा की गई।

आयोजित कार्यशाला के प्रथम सत्र में कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए जिला पंचायत बालोद के सीईओ डाॅ. संजय कन्नौजे ने शिक्षक की अध्यापन रणनीतियों, समावेशी शिक्षा पर सीखने के प्रतिफलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षक रणनीति बनाकर अध्यापन का कार्य करें तो निश्चित रूप से कक्षा के सारे बच्चों को इसका सही लाभ मिलेगा। सीईओ डाॅ. कन्नौजे ने कार्यशाला में उपस्थित सभी शिक्षकों से अपील की कि यहाँ से जो सिख कर जाएं अपने व्यवहार में जरूर लाएं।

कार्यशाला में जिले के सभी ब्लॉक के प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, हाई स्कूल, हायर सेकेंडरी स्कूल के संस्था प्रमुख 122 की संख्या में उपस्थित हुए। कार्यशाला में जानकारी देने वक्ता के रूप में राज्य श्रोत सदस्य डॉक्टर रजनी नेल्सन, जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान दुर्ग की प्राचार्य डॉक्टर शिशिरकला भट्टाचार्य, जिला शिक्षा अधिकारी पीसी मरकले, जिला नोडल अधिकारी सत्येंद्र शर्मा वक्ता के रूप में मौजूद रहे।

कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत बालोद के सीईओ डाॅ. संजय कन्नौजे मौजूद रहे। विशेषज्ञ वक्ताओं ने बताया कि इस एक्ट के तहत उल्लेखित किया गया है कि बच्चों को उनकी स्थिति के आधार पर शिक्षा देनी है। उनके साथ व्यवहार सरलतापूर्वक करना है। किसी भी बच्चे को दंड नहीं दिया जा सकता। इसके अलावा 6 से 14 वर्ष के बच्चों को हर हाल में शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी एवं पूर्व डाइट प्राचार्य तथा राज्य मुख्य स्रोत शिक्षक डॉ. रजनी नेल्सन ने शिक्षकों को संयमित रहने की बात कही। उन्होंने विद्यार्थियों की वैयक्तिक भिन्नता पर ध्यान रखने पर बल दिया। पूरे कार्यशाला में विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने आरटीई 2009 के 17 आर्टिकल को बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हम शिक्षक होने के नाते जहां अपने कर्तव्य का पालन करने सजग रहें वही हमें व्यावहारिक भी होना पड़ेगा। कार्यशाला में जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि जिले के स्कूलों में आरटीई के नियमों एवं प्रावधानों शत प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि बच्चों का मन कोमल होता है। सभी जानते हैं उसे हम जिस रूप में ढालें ढाल सकते हैं। हमारा दायित्व है प्रत्येक बच्चा अच्छा नागरिक बने इसलिए हमें उनके साथ अच्छा व्यवहार करना होगा.

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Author: Deepak Mittal

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