जे के मिश्र नवभारत टाइम्स 24 x7in ब्यूरो प्रमुख बिलासपुर
छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध नियंत्रण और अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार ब्यूरो (ईओडब्ल्यू-एसीबी) की टीम ने शराब कारोबारी के दफ्तर और निवास स्थान में छापेमार की है।

यह खबर प्राप्त हुई है कि इससे पूर्व बाजार से शराब खरीदने की जिम्मेदारी बेवरेज कार्पोरेशन ऑफ छत्तीसगढ़ (बीसीसी) के पास थी। मार्च 2020 में इस संस्था से शराब खरीदने के सारे अधिकार कुछ निजी संस्थाओं को दे दिए गए थे।
गुरुवार की सुबह, आर्थिक अपराध नियंत्रण और अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार ब्यूरो की टीम ने प्रदेशभर में कई स्थानों पर छापेमार की है। इस कड़ी में, बिलासपुर में भी शराब कारोबारी से जुड़े दफ्तर और निवास स्थानों में टीम ने छापेमार की है। यहाँ पर दस्तावेज़ संकलन के साथ-साथ अन्य जानकारियाँ भी एकत्रित की गई हैं। बताया जा रहा है कि, रायपुर के एक शराब कारोबारी को एफएल 10ए का लाइसेंस है। जिसके तहत उनकी कंपनी शराब खरीदकर सरकार को सप्लाई करती है, लेकिन इसके बदले में बड़े पैमाने पर कमीशन के खिलाफ आपत्ति जताई जा रही है। इस मामले की जांच के लिए ईओडब्ल्यू-एसीबी की टीम शराब कारोबारी के बिलासपुर में रहने वाले एक अन्य कारोबारी के दफ्तर और निवास पर पहुंची है।

केस के बारे में
आर्थिक अपराध नियंत्रण और अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार ब्यूरो के द्वारा छत्तीसगढ़ में हुए तकरीबन 6 हजार करोड़ रुपये के शराब घोटाले की जांच की जा रही है। इस मामले में शराब कारोबारी अरविंद सिंह और अनवर ढेबर को गिरफ्तार किया गया है। उन से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी से जुड़े की माने तो प्रदेशभर में छापामार कार्रवाई इन दोनों से पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर की जा रही है।
पिछली छापेमार कार्रवाई,,,,,इससे पूर्व भी आर्थिक अपराध नियंत्रण और अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार ब्यूरो (ईडी) ने ईओडब्ल्यू-एसीबी में केस दर्ज कराया था। केस दर्ज करने के बाद करीब दो महीने पहले बिलासपुर के सरगांव स्थित भाटिया डिस्टिलरी और कोटा स्थित वेलकम डिस्टिलरी में छापेमारी की गई थी। साथ ही दुर्ग के कुम्हारी दुर्ग स्थित केडिया डिस्टिलरी, रायपुर में अनवर ढेबर, पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड समेत रिटायर्ड आइएएस अनिल टुटेजा के ठिकानों पर जांच की गई थी। जहाँ से कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ टीम को मिली थी। उसके बाद टीम ने गुरुवार कई स्थानों पर छापेमार कार्रवाई की थी।
एफएल-10 लाइसेंस क्या है?,,,,,एफएल-10 लाइसेंस प्राप्त कंपनियां बाजार से शराब खरीद कर सरकार को सप्लाई करती हैं। इसके अलावा, इन कंपनियों को शराब की खरीदी के साथ-साथ भंडारण और परिवहन का भी काम करने का अधिकार मिलता है। इस मामले में आशंका जताई जा रही है कि पिछली सरकार में हुए तकरीबन 6 हजार करोड़ रुपये के शराब घोटाले के तार इन शराब ठेकेदारों और कंपनियों से भी जुड़े हुए हैं।,,






जे के मिश्र नवभारत टाइम्स 24 x7in ब्यूरो प्रमुख बिलासपुर
*(दीपक मित्तल नवभारत टाइम्स 24X7.in प्रधान संपादक रायपुर)*
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Author: Deepak Mittal











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