रायपुर के बाजारों में गर्मी के दिनों में देसी फ्रिज की बड़ी मांग,,

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Deepak Mittal

 

*दीपक मित्तल रायपुर छत्तीसगढ़*

दीपक मित्तल बालोद रायपुर

रायपुर,, रायपुर छत्तीसगढ़ प्रदेश सहित दल्ली राजहरा के बाजारों में गर्मी के चलते देसी फ्रिज की मांग तेजी से बढ़ने लगी है दल्लीराजहरा के न्यू मार्केट,कुम्हार पसरा बाजार में इन दोनों दर्जनों कुम्हार मिट्टी के घड़े एवं सुराही गुल्लक सजाए हुए हैं इन दिनों मिट्टी के घड़ों की मांग तेजी से बढ़ गई है अब आमजन इसे देसी फ्रिज का नाम देने लगे हैं,गर्मी के दस्तक देते ही दल्लीराजहरा शहर के बाजारों में देसी फ्रिज की डिमांड बहुत बढ़ जाती है। वही लगातार तापमान मे बढ़ोतरी भी हो रही हैं। पारा 42 डिग्री को छू चूका हैं और लगातार तापमान में आगामी दिनों में और इज़ाफ़ा देखने को मिलेगा। ऐसे मे जहां एक तरफ लोग लू से खुद को बचाने मे जुटे हैं तो वहीं दूसरी ओर दल्लीराजहरा बाजार मे देशी फ्रिज के बिक्री मे इज़ाफ़ा होने लगा हैं।

एक से बढ़कर एक डिजाइन के घड़े
दल्लीराजहरा मे हर वर्ष गर्मी के मौसम मे तापमान 42- से 45 डिग्री को पार कर जाता हैं, इस मौसम मे देशी फ्रिज यानी मिट्टी के घड़े और सुराही की बिक्री बढ़ जाती हैं, दल्लीराजहरा बाजार मे इन दिनों नल लगे हुए घड़े और सुराही खूब बिक रहे हैं। इसमें एक से बढ़कर एक डिजाइन भी देखने को मिल रहा हैं। दुकानदारों के अनुसार बाजार मे 50 रूपए से लेकर 200 रूपए तक का घड़ा उपलब्ध हैं, जिनकी बिक्री खूब हो रही हैं,,,

सूर्य की तपिश ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। दल्लीराजहरा के अन्य हिस्सों के साथ में पारा 41 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। मौसम विभाग ने हीट वेव का अलर्ट जारी किया है। गर्मी का आलम यह है कि प्रातः काल में भी हमेशा गर्म पानी ही निकल रहा है।

ऐसे में अपने शरीर को ठंडा रखने के लिए संपन्न लोग तो फ्रीज का सहारा ले रहे हैं लेकिन मिट्टी के फ्रिज की भी काफी डिमांड हो गई है। मिट्टी का फ्रिज यानी मिट्टी के घड़े का डिमांड गांव से लेकर दल्लीराजहरा शहर तक काफी बढ़ गई है।

खास बात है कि बदलते युग के साथ अब इसमें भी आधुनिकता आ गई है। मिट्टी के कलाकारों ने उसमें नल (टोंटी) लगा दिया। दल्लीराजहरा के कुम्हार पसरा बाजार में यह मिट्टी का घड़ा 50- से 200 सौ तक में बिक रहा है और बड़े पैमाने पर लोग खरीद रहे हैं। गर्मी में मटके का पानी जितना ठंडा और सुकूनदायक लगता है, स्वास्थ्य के लिए भी उतना ही फायदेमंद भी होता है।,,

घड़े का पानी शरीर में टेस्टोस्टेरॉन का स्तर बढ़ता है

आयुर्वेद चिकित्सा से जुड़े लोगों का कहना है कि मिट्टी के घड़े का पानी पीना सेहत के लिए फायदेमंद है। इसका तापमान सामान्य से थोड़ा ही कम होता है जो ठंडक तो देता ही है, पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में भी मदद करता है। इसे पीने से शरीर में टेस्टोस्टेरॉन का स्तर बढ़ता है। इसमें मृदा के गुण भी होते हैं जो पानी की अशुद्धियों को दूर कर लाभकारी मिनरल्स प्रदान करते हैं।

शरीर को विषैले तत्वों से मुक्त कर प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने में यह पानी फायदेमंद होता है। फ्रिज के पानी की अपेक्षा यह अधिक फायदेमंद है, इस पानी से कब्ज और गला खराब होने जैसी समस्याएं नहीं होती। इसके अलावा यह सही मायने में शरीर को ठंडक देता है। इस पानी का पीएच संतुलन सही होता है। जो शरीर को किसी भी तरह की हानि से बचाते हैं, संतुलन बिगड़ने नहीं देते।

क्या कहते हैं जानकार लोग,,
मटके के संबंध में जानकारी उपेंद्र कुमार साहू, रोहित कुंभकार, चरण कुमार ने कहा कि
मटके का पानी प्राकृतिक तौर पर ठंडा होता है, जबकि फ्रिज का पानी इलेक्ट्रिसिटी की मदद से,,एक बड़ा फायदा यह भी है कि इसमें बिजली की बचत होती है और मटके बनाने वालों को रोजगार मिलते रहता है। मिट्टी में कई प्रकार के रोगों से लड़ने की क्षमता पाई जाती है। मिट्टी के बर्तनों में पानी रखा जाए, तो उसमें मिट्टी के गुण आ जाते हैं। इसलिए घड़े में रखा पानी हमें स्वस्थ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

दल्लीराजहरा शहर में घड़ा बेच रहे विनोद कुमार,, राम बाई,पायल ने बताया कि आज लोग आधुनिकता के दौर में मटके को भूल चुके हैं लेकिन मटके में भी जब आधुनिकता आई तो डिमांड बढ़ी। हम अब मिट्टी का घड़ा बनाकर उसमें नल लगा देते हैं। जिससे लोगों को पानी निकालने में सहूलियत हो रही है। पिछले सप्ताह से जब गर्मी बढ़ी तो डिमांड बढ़ गई है।

इंटर पास विनोद कुमार बताते हैं कि हमने किताबों में मिट्टी के घड़ा के कई फायदे पढ़े हैं। गर्मी के दिन में प्यास बुझाने के लिए लोग ठंडा पानी पीते हैं। पानी ठंडा करने के लिए ज्यादातर लोग फ्रिज का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन गरीबों के लिए तो मिट्टी का बना घड़ा ही देसी फ्रिज है। पीढ़ियों से घरों में पानी रखने के लिए मिट्टी के बर्तन का इस्तेमाल किया जाता रहा है।

मिट्टी की भीनी-भीनी खुशबू के कारण घड़े का पानी पीने का आनंद अलग है। मिट्टी के बने मटके में सूक्ष्म छिद्र होते हैं। पानी का ठंडा होना वाष्पीकरण की क्रिया पर निर्भर करता है। जितना ज्यादा वाष्पीकरण होगा, उतना ही ज्यादा पानी भी ठंडा होगा। इन सूक्ष्म छिद्रों द्वारा मटके का पानी बाहर निकलता रहता है। गर्मी के कारण पानी वाष्प बन कर उड़ जाता है। वाष्प बनने के लिए गर्मी यह मटके के पानी से लेता है। इससे मटके का तापमान कम हो जाता है और पानी ठंडा रहता है।,,00

 

 

 

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