आस्था योगपीठ, दुर्ग में रश्मि शुक्ला सिखा रही हैं तन-मन को जोड़ने की कला, ancient science को बना रही हैं आज की ज़रूरत
दुर्ग। योग सिर्फ एक व्यायाम नहीं, बल्कि भारतीय प्राचीन परंपरा का वह अमूल्य उपहार है जो तन, मन और आत्मा को जोड़ता है। योग की शुरुआत लगभग 5000 वर्ष पूर्व मानी जाती है और भारत को इसका जन्मदाता कहा जाता है। महर्षि पतंजलि को योग का जनक माना जाता है, जिन्होंने योगसूत्रों के माध्यम से इसे व्यवस्थित रूप दिया।
आज की तेज़ रफ्तार और तनावभरी जिंदगी में योग पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है। शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मानसिक शांति देने वाला यह अभ्यास अब दुनियाभर में लोकप्रिय हो रहा है।
योग गुरु रश्मि शुक्ला, जो दुर्ग के मिनाक्षी नगर स्थित आस्था योगपीठ की संस्थापक हैं, कहती हैं कि “योग केवल शरीर को लचीला बनाना नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और सकारात्मक बनाना है।” उनके मार्गदर्शन में सैकड़ों लोग प्रतिदिन योगाभ्यास कर रहे हैं और मानसिक एवं शारीरिक रूप से खुद को मज़बूत बना रहे हैं।
रश्मि शुक्ला का उद्देश्य है कि हर व्यक्ति योग को अपनाकर एक संतुलित, खुशहाल और स्वस्थ जीवन जिए। वह विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं को योग के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का संदेश दे रही हैं।
Author: Deepak Mittal









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