विकास के लिए शिक्षित वर्ग को आवश्यक मार्गदर्शन करना होगा

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महाराष्ट्र के अरततोंडी में गोंड़वाना सामाजिक सभा सम्पन्न

मुज़्ज़म्मिल खान, ब्यूरो राजनांदगाव

राजनांदगाव गत दिनों महाराष्ट्र के गोंदिया जिला के अर्जुनी-मोरगांव तहसील के केशोरी के समीप ग्राम अरततोंडी (परसटोला)में गोंडवाना स्टूडेंट युनियन शाखा अरततोंडी के तत्वावधान में गोंड़वाना सामाजिक सभा सम्पन्न हुआ जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में सामिल कोयतुर गोंड़ समाज ब्लाक छुरिया-डोंगरगढ़ के अध्यक्ष दिनेश कुरेटी दिलेर ने कहा सामाजिक विकास के लिए समाज के शिक्षित वर्ग को सामाजिक संगठन से जुड़कर आवश्यक मार्गदर्शन करना होगा तभी गोंड़ समाज का विकास संभव है।
कार्यक्रम के अध्यक्ष गोंड़ी साहित्यकार नंदकिशोर नेताम,उदघाटक गोंड़ी साहित्यकार एवं समाजिक कार्यकर्ता गणेश हलामी,ध्वजारोहक डाॅ नानुक कुमरे, मुख्यअतिथि वक्ता महाराष्ट्र के सुप्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता देवाजी तोफा एवं कोयतुर गोंड़ समाज ब्लाक इकाई छुरिया-डोंगरगढ़ के अध्यक्ष एवं साहित्यकार दिनेश कुरेटी दिलेर रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ बिरसा मुंडा के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर सेवा अर्जी के साथ किया गया पश्चात अतिथियों का स्वागत किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि वक्ता दिनेश कुरेटी दिलेर ने कहा कि आदिवासी समाज के पिछड़ेपन का प्रमुख कारण विकास परक सोच का अभाव है ।आदिवासी समाज के विकास के लिए समाज के शिक्षित वर्ग को सामाजिक संगठन से जुड़कर आवश्यक मार्गदर्शन करना होगा। आदिवासी समाज के लोगों के पास जमीन होने के बाद भी पर्याप्त मात्रा में फसल का उत्पादन नहीं कर पाते। आदिवासी समाज में व्यापारिक एवं व्यावसायिक सोच का सर्वथा अभाव है। व्यावसायिक एवं व्यावसायिक सोच के अभाव में आदिवासी समाज आर्थिक रूप से कमजोर कमजोर है। व्यापार करने से आर्थिक समृद्धि होती है। व्यापारिक सोच से विकास परक काम किया जा सकता है।शिक्षा के अलग-अलग स्तर होते है सभी शिक्षा स्तर को प्राप्त करना होगा। आदिवासी समाज को उनके संस्कृति,बोली भाषा,रीति-रिवाजों के कारण आरक्षण मिला है लेकिन आदिवासी समाज के लोग जैसे- जैसे शिक्षित होते जा रहे है वैसे-वैसे अपने प्राचीन रीति- रिवाज एवं रिश्ता- नाता को भूलते जा रहे है। आरक्षण को बचाने के लिए प्राचीन संस्कृति को बचाना होगा। भाषा संस्कृति की जननी है अत: गोंड़ी संस्कृति को बचाने के लिए गोंड़ी भाषा को बचाना होगा।
देवाजी तोफा ने कहा कि हमारे समाज के लोग अपने अधिकारों को भूलते जा रहे हैं। अपने अधिकारों की रक्षा के लिए ग्रामसभा को मजबूत करना होगा।आजकल फर्जी ग्रामसभा के माध्यम से आदिवासी समाज को उनके मूल अधिकारों से वंचित किया जा रहा है जो कि अत्यंत ही चिंतन का विषय है। ग्राम सभा को सशक्त करने की आवश्यकता है। ग्रामसभा की मजबूती के लिए गांव के लोगों को एकता के सूत्र में बंधना होगा।
सभा को समाज प्रमुख गणेश हलामी, नंदकिशोर नेताम, डाॅ नानुक कुमरे एवं तोमन आचले ने संबोधित कर आदिवासी समाज को अपने मूल संस्कृति,बोली, भाषा को बचाय रखने का आव्हान किया ।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से कार्यक्रम के संयोजक सुदाम कोवे, दुर्योधन आड़े, जयंत कुमार मंडावी,तोमन कुमार आचले,नरेन्द्र मंडावी, भूपेन्द्र कुमार सोरी,तेजराम पोरेटी, सुकलाल हारामी, अखिलेश हारामी, रतिराम पोरेटी, यशवंत बोगारे, धनराज पेन्दाम,सुरेन्द्र सलामें, विश्वनाथ दर्रो, शंकर सिंह गावड़े,अमरू मंडावी, बाजीराव नेताम, बसंता ताई मुलेटी, रामू कुमरे, विनायक मरस्कोले, अंताराम तारम, वामन तारम हीरासिंग मंडावी, रामनाथ तारम आदि सहित गोंडवाना स्टूडेंट युनियन शाखा अरततोंडी(परसटोला) के पदाधिकारी एवं सदस्यगण तथा आदिवासी समाज के लोग हजारों की संख्या में उपस्थित थे।

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Author: Deepak Mittal

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