दल्लीराजहरा, लाल ईटों का अवैध कारोबार धड़ल्ले से दल्लीराजहरा शहर सहित क्षेत्र में आखिर कब तक चलता रहेगा ,,????? अवैध ईटा भट्टा का कार्य के अलावा अवैध कार्यों की नगरी दल्लीराजहरा हो गई है जितने अधिक अवैध कार्य दल्ली राजहरा सहित आसपास क्षेत्र में अवैध रूप से होते हैं संभवतः बालोद जिले सहित प्रदेश में कहीं नहीं होते होंगे कारण की अवैध कारोबार को करने के लिए दल्ली राजहरा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच होड़ मची हुई है और अवैध कार्य को करने वाले लोग यह समझते हैं कि वे प्रभावशाली हैं प्रभाव का इस्तेमाल कर अवैध कार्य करने में लिप्त हैं इसी तरह बिना रायल्टी के राजहरा सहित आसपास क्षेत्र में सैकड़ों अवैध ईटा भठ्ठा का संचालन किया जा रहा है. कार्यवाही नहीं होने की वजह से ईटा भठ्ठा संचालकों के हौसले बुलंद हो गए हैं. वहीं खनिज विभाग पूरी तरह कुंभकरणी नींद में सोया हुआ है दल्लीराजहरा के वार्ड 13 घोड़ा मंदिर के समीप भी अवैध रूप से ईटा भठ्ठा का संचालन किया जा रहा है. वार्डवासियों के अनुसार शिकायत किए जाने के बावजूद कार्यवाही नहीं हो रही है जिसे लेकर वार्डवासियों में आक्रोश व्याप्त है. दल्लीराजहरा सहित वनांचल सहित शहरी इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से ईंट भट्ठे का संचालन किया जा रहा है. ईंट निर्माण करने वाले ठेकेदार खनिज विभाग में अनुमति के लिए आवेदन भी लगाए है लेकिन खनिज विभाग द्वारा अब तक किसी प्रकार से अनुमति नहीं दिया गया है क्योंकि फार्मेल्टी पूरा करने के लिए जो दस्तावेज मांगा जाता है वह पूरा नहीं हो पाता इसी के चलते काफी संख्या में लोग बिना अनुमति लिए ही अवैध तरीके र्से इंट भट्ठे का संचालन शुरू कर देते हैं.
दल्लीराजहरा सहित अंचल र्में ईट बनाने का कार्य प्रारंभ हो गया है. नदी के किनारे ईट बनाए जाने के इनकी दिशा ही बदलने लग गई है. गौण खनिज अधिनियम के तहत कोई भी ईंट का निर्माण लिगल तौर पर नहीं कर सकता है. खनिज नियम के तहत किसी को ईंट निर्माण के लिए परमिशन नहीं दिया गया है. इसके बाद भी जिले में 200 से अधिक ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं. इसकी जानकारी विभाग के अधिकारियों को भी है. लेकिन किसी प्रकार से कार्रवाई नहीं की जाती है. ईंट निर्माण वनांचल में भी तेजी से हो रहा है. कठोर कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण संचालकों के हौसले बूलंद होते जा रहे हैं. एक ही भट्ठे के पास आधा दर्जन से अधिक ईंट भट्ठे दिखाई देते हैं. इससे पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है.
गांव में फैल रही जहरीली हवा
मूलत इस ईंट को पकाने के लिए उच्च स्तरीय कोयले का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन राशि बचाने के चक्कर में यह अवैध निर्माता ईट को सोयाबीन की अवशेष व लकड़ी से पकाते हैं. इस वजह से इससे उठने वाला धुआं पर्यावरण सहित लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर डालता है. इस तरह से कई भट्ठे आबादी क्षेत्र में संचालित किया जा रहा है. इससे लोगों के स्वास्थ्य बूरा असर पड़ रहा है. बेखौफ होकर कर रहे निर्माण वन क्षेत्र, ग्रामीण क्षेत्र, राजस्व जमीन सहित सभी जगहों पर अवैध रुप से ईंट भट्ठे का निर्माण किया जा रहा है. इसके लिए ठेकेदार न तो वन विभाग से परमिशन लिया है, न ही पंचायत से न ही तहसील कार्यालय से कहीं से भी परमिशन नहीं लेने के बाद भी क्षेत्र में अवैध तरीके से ईंट निर्माण किया जा रहा है. इसके बाद भी अधिकारी इन पर कोई कार्यवाही नहीं करते हैं. खनिज व राजस्व विभाग से बिना अनुमति लिए नियम कानून को ताक में रखकर सरकारी व निजी जमीन में अवैध तरीके से बेरोकटोक ईंट बनाने का धंधा बेखौफ जारी है. बढ़ रही मनमानी दल्लीराजहरा एवं क्षेत्र में संचालित ईंट भट्ठा संचालकों ने खनिज विभाग से एनओसी नहीं लिया है. साथ ही पर्यावरण विभाग से भी अनुमति नहीं ली गई है. बावजूद इसके जांच या कार्यवाही नहीं होने से संचालकों की मनमानी बढ़ती जा रही है. इधर भट्ठा संचालक अवैध विद्युत कनेक्शन भी ले रखे हैं. इस तरह अवैध भट्ठा संचालन से सरकार को रायल्टी का नुकसान पहुंचा रहे हैं. सरकार को लग रहा राजस्व का बट्टा नदी, नालों, घाटों के किनारे खेत व तालाब से लगे जमीन के आसपास दूर-दूर तक ईंट बनाने का काम चल रहा है. इससे लाखों रुपए की रायल्टी चोरी हो रही है. वहीं सरकार को भी राजस्व का बट्टा लगाया जा रहा है. लाखों कमाने के लालच में ये राजस्व व खजिन विभाग को चूना लगा रहे हैं. ईंट व्यावसायियों ने अपने व्यावसायिक लाभ के लिए नदियों की दिशा ही बदल दी है. ईंट भट्ठी की आड़ में ठेकेदार धीरे-धीरे जंगली क्षेत्रों में भी घूम रहे हैं तथा वन क्षेत्रों में स्थापित ईंट भट्ठों में जंगल से अवैध रूप से काटी गई लकड़ियों का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है. दल्लीराजहरा सहित डौण्डी ब्लाक के धोबनी अ, धोबनी ब, भर्रीटोला 43, रजही, चिपरा, ध्रुवाटोला, सुवरबोड़, दानीटोला सल्हाईटोला, कोटागांव, नलकसा,कुमुडकट्टा, आड़ेझर, खैरवाही, नर्राटोला, चिखली, साल्हे, आड़ेझर सहित घोड़ा मंदिर एरिया, महामाया क्षेत्र, कुसुमकसा क्षेत्र, पल्लेकसा सहित अन्य क्षेत्रों में ईंट भट्ठे का कारोबार इन दिनों बेखौफ चल रहा है इन संचालकों द्वारा ईंट भट्ठे के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है,,
क्या कहते हैं अधिकारी,,
जिला प्रभारी खनिज अधिकारी श्री मिश्रा कहते हैं कि ईटा निर्माण के लिए शासन के नियम अनुसार लीज एवं पंजीयन का कार्य कराया जाना आवश्यक होता है अगर कोई अवैध रूप से कार्य कर रहा है तो उस पर कड़ी कार्रवाई किया जाएगा
Author: Deepak Mittal










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