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राजधानी रायपुर में सड़क सुरक्षा की खुली पोल: खम्हारडीह थाना के सामने गड्ढा बना हादसों का अड्डा, राहगीर चोटिल, जिम्मेदार विभाग गहरी नींद में!

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Deepak Mittal

मुख्य मार्ग पर ही सुरक्षित नहीं राजधानी के नागरिक, सुबह स्कूल जाने वाले बच्चे और महिलाओं पर मंडरा रहा हादसों का खतरा; आखिर किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा शासन-प्रशासन?

(विनी बिरे की कलम से,,, रायपुर छत्तीसगढ़)

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बेहतर सड़क व्यवस्था और सुरक्षित आवागमन के दावों के बीच खम्हारडीह थाना के ठीक सामने मुख्य सड़क पर बना गड्ढा शासन-प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। राजधानी के प्रमुख मार्ग पर, वह भी पुलिस थाने के ठीक सामने, सड़क की ऐसी बदहाल स्थिति होना जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करता है। सड़क पर मौजूद गड्ढे के कारण राहगीरों के गिरने और चोटिल होने की शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान को लेकर संबंधित विभागों की सक्रियता दिखाई नहीं देने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
विडंबना यह है कि जिस राजधानी में प्रशासनिक व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और नागरिक सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहां एक प्रमुख सड़क के गड्ढे को दुरुस्त करने में भी लापरवाही दिखाई दे रही है। जब मुख्य मार्ग की यह स्थिति है, तो शहर के अंदरूनी मार्गों की बदहाली का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

थाना सामने, फिर भी सड़क पर खतरा बरकरार
खम्हारडीह थाना के ठीक सामने सड़क पर बना गड्ढा महज सड़क की खराबी नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल है। इस मार्ग से प्रतिदिन दोपहिया वाहन चालक, पैदल राहगीर, महिलाएं, स्कूली बच्चे और अन्य वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सड़क पर मौजूद गड्ढा किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकता है।

मुख्य मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को अचानक गड्ढा दिखाई देने पर वाहन संभालने में परेशानी हो सकती है। दोपहिया वाहन का संतुलन बिगड़ने से चालक और पीछे बैठे व्यक्ति के गिरने का खतरा बना रहता है। यदि पीछे से तेज गति में कोई वाहन आ रहा हो, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

सवाल यह है कि जब समस्या इतने महत्वपूर्ण स्थान पर मौजूद है, तो संबंधित विभाग की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ रही है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार है?

सुबह स्कूल जाने की जल्दबाजी, बच्चों और महिलाओं के लिए बढ़ा जोखिम
सुबह का समय इस मार्ग से गुजरने वाले परिवारों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक हो सकता है। स्कूल जाने की जल्दबाजी में बच्चे और उन्हें छोड़ने जा रहे अभिभावक सड़क से गुजरते हैं। कई महिलाएं अपने बच्चों को दोपहिया वाहनों पर बैठाकर स्कूल ले जाती हैं। इस दौरान यदि सड़क पर बने गड्ढे पर समय रहते नजर नहीं पड़े, तो वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है और बच्चे सहित महिला सड़क पर गिर सकती है।

सुबह की भीड़ और समय की कमी के बीच अचानक सामने आने वाले गड्ढे से बचने के प्रयास में चालक का वाहन दूसरी ओर मुड़ सकता है, जिससे आसपास चल रहे दूसरे वाहनों के साथ टक्कर की आशंका भी पैदा होती है।

बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी ऐसी स्थिति को सामान्य सड़क समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सड़क की मरम्मत करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। यदि किसी स्थान पर लगातार दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है, तो वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।

आम नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल, जिम्मेदार जनप्रतिनिधि कहां?
राजधानी के नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी शासन, प्रशासन और नगर निगम की है। सड़क का रखरखाव, गड्ढों की मरम्मत और दुर्घटना संभावित स्थानों पर सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित एजेंसियों के दायित्व में आता है।
इसके बावजूद यदि मुख्य मार्ग पर गड्ढा बना रहता है और लोगों को रोजाना जोखिम उठाकर वहां से गुजरना पड़ता है, तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। जनता की समस्याओं को सामने लाना और संबंधित विभागों से उनका समाधान कराना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।

क्या इस सड़क से जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और अधिकारी नहीं गुजरते? क्या उन्हें राहगीरों की परेशानी दिखाई नहीं देती? या फिर आम जनता की सुरक्षा से जुड़ी समस्या भी किसी शिकायत, आवेदन और औपचारिक प्रक्रिया के बाद ही दूर की जाएगी?

राजधानी की सड़कों के दावों की हकीकत उजागर
रायपुर प्रदेश की राजधानी है। यहां प्रदेशभर से लोग सरकारी कामकाज, इलाज, शिक्षा और व्यापार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे शहर के प्रमुख मार्ग पर सड़क की बदहाल स्थिति व्यवस्था की छवि पर भी सवाल खड़े करती है।
जब मुख्य मार्ग पर ही नागरिकों को सुरक्षित आवागमन की गारंटी नहीं मिल पा रही है, तो शहर की अन्य सड़कों की स्थिति को लेकर सवाल उठना लाजिमी है। सड़क निर्माण और मरम्मत पर खर्च होने वाले सरकारी धन, गुणवत्ता की निगरानी और समय पर रखरखाव की व्यवस्था की प्रभावशीलता की समीक्षा होनी चाहिए।
सड़क पर गड्ढा बनने के बाद उसकी समय पर मरम्मत क्यों नहीं होती? शिकायतों पर कार्रवाई की निगरानी कौन करता है? दुर्घटना की आशंका वाले स्थानों को चिह्नित कर तत्काल सुधार करने की जिम्मेदारी किसकी है? इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों को देना चाहिए।
संभावित हादसे की जिम्मेदारी कौन लेगा?
सड़क पर गड्ढा मौजूद होने के बावजूद यदि समय रहते उसकी मरम्मत नहीं की जाती, तो दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ऐसी स्थिति में किसी राहगीर, बच्चे या महिला के गंभीर रूप से चोटिल होने पर जवाबदेही तय करना जरूरी होगा।

प्रशासन को यह समझना होगा कि सड़क सुरक्षा केवल यातायात नियमों का पालन कराने तक सीमित नहीं है। सुरक्षित सड़क उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। वाहन चालकों से सावधानी बरतने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन सड़क की खराब स्थिति को नजरअंदाज करके पूरी जिम्मेदारी नागरिकों पर नहीं डाली जा सकती।

यदि खम्हारडीह थाना के सामने का गड्ढा दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है, तो सबसे पहले उसकी तत्काल मरम्मत, आवश्यक चेतावनी संकेत और संबंधित विभाग की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अब सवाल नहीं, कार्रवाई चाहिए

खम्हारडीह थाना के सामने सड़क पर बने गड्ढे को लेकर संबंधित नगर निगम अधिकारियों, सड़क के रखरखाव के लिए जिम्मेदार विभाग और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। गड्ढे की मरम्मत कर सड़क को सुरक्षित बनाया जाए तथा यह भी स्पष्ट किया जाए कि समस्या सामने आने के बावजूद उसके समाधान में देरी क्यों हो रही है।

जनता को आश्वासन नहीं, सुरक्षित सड़क चाहिए। निरीक्षण की औपचारिकता नहीं, जमीन पर काम चाहिए। राजधानी के प्रमुख मार्ग पर आम नागरिकों की सुरक्षा को इस तरह जोखिम में नहीं छोड़ा जा सकता।

अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग इस समस्या को गंभीरता से लेकर तत्काल कार्रवाई करते हैं या फिर यह गड्ढा किसी बड़ी दुर्घटना के इंतजार में यूं ही बना रहता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या राजधानी रायपुर में सड़क की मरम्मत कराने के लिए भी किसी बड़े हादसे का इंतजार करना पड़ेगा?

स्कूल जा रहे बच्चे की माता सुनीता, मंजू ने बताया कि “सुबह बच्चों को स्कूल छोड़ने की जल्दी रहती है। सड़क पर गड्ढा अचानक सामने आ जाए तो दोपहिया वाहन संभालना मुश्किल हो जाता है। बच्चों को लेकर निकलते समय हमेशा डर बना रहता है। संबंधित विभाग को इस गड्ढे को तत्काल भरवाना चाहिए, ताकि किसी बच्चे या महिला के साथ गंभीर हादसा न हो।”

संभावित प्रतिक्रिया —
स्थानीय महिला राहगीर दीपिका ने कहा कि “इस मार्ग से रोजाना आना-जाना होता है। सड़क पर गड्ढा होने से परेशानी होती है और वाहन चलाते समय संतुलन बिगड़ने का डर बना रहता है। यदि लोगों की सुरक्षा के लिए समय पर मरम्मत नहीं की जाएगी, तो आखिर आम नागरिक अपनी समस्या लेकर कहां जाएं? अधिकारियों को मौके पर आकर स्थिति देखनी चाहिए।”

चोटिल हुए व्यक्ति का रामेश्वर साहू कहते हैं
“गड्ढे के कारण वाहन का संतुलन बिगड़ने से गिरने और चोट लगने जैसी स्थिति बनी। सड़क पर इस तरह की खराबी रहने से दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता है। संबंधित विभाग को तत्काल मरम्मत करानी चाहिए, ताकि दूसरे लोगों को ऐसी परेशानी न उठानी पड़े।”

नगर निगम के संबंधित अधिकारी सड़क रखरखाव विभाग कहते हैं कि
“सड़क पर बने गड्ढे की जानकारी लेकर संबंधित स्थल का निरीक्षण कराया जाएगा। स्थिति की जांच के बाद आवश्यक मरम्मत के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जाएंगे। नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समस्या का निराकरण कराने का प्रयास किया जाएगा।”

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Author: Deepak Mittal

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