झारखंड से था मनमोहन सिंह का गहरा लगाव, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने साझा की यादें

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देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का गुरुवार की रात निधन हो गया, वो 92 साल के थे, जिसके बाद पूरा देश शोक में डूब गया. मनमोहन सिंह के निधन के बाद उनके के साथ उनकी कैबिनेट में रहे नेता अपनी यादें साझा कर रहे हैं.

मनमोहन सिंह के साथ UPA 1 और UPA 2 में कैबिनेट में सहयोगी रहे सुबोध कांत सहाय ने आजतक को फोन पर बताया कि मनमोहन सिंह इकोनॉमिक्स के ब्रॉड विजन रखने वाले इनक्रेडिबल और इनकंपैरिबल शख्सियत थे.

उनका झारखंड से भी गहरा लगाव था. सहाय ने बताया कि 2008 अप्रैल में उन्होंने बोकारो स्टील प्लांट के विस्तारीकरण यानी एक्सपेंशन और आधुनिकरण यानी मॉडर्नाइजेशन की आधारशिला रखी थी, साथ ही HEC का दो बार रिवाइवल भी उन्हीं के कार्यकाल में हुआ था.

‘HEC अच्छे से चलना चाहिए’

सुबोध कांत सहाय ने कहा कि HEC को लेकर मनमोहन सिंह चिंतित रहते थे और उनका कहना था ‘यह संगठन चलना चाहिए. रिसर्च को लेकर यहां के कार्यों को लेकर वो सराहना करते थे और चाहते थे कि ये संस्था अच्छे से चलती रहे.

सहाय ने कहा कि मनमोहन सिंह ने मनरेगा के लॉन्चिंग के लिए झारखंड को ही चुना था. ये पहली योजना थी जो तब कम से कम सौ दिनों के रोजगार की गारंटी मजदूरों को देती थी.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी के निधन के समाचार से मैं गहरे शोक में हूं।
वे एक महान अर्थशास्त्री और उत्कृष्ट नेता थे।
उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएँ।
उनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व ने भारत को एक नई आर्थिक दिशा दी।

 

 

‘मनमोहन सिंह के नेतृत्व ने भारत को नई दिशा दी’

अपनी यादें साझा करते हुए सहाय भावुक हो गए, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी के निधन के समाचार से मैं गहरे शोक में हूं. वे एक महान अर्थशास्त्री और उत्कृष्ट नेता थे. उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं हैं, उनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व ने भारत को नई आर्थिक दिशा दी है. देश में उनके द्वारा लाई गई आर्थिक क्रांति और प्रगतिशील बदलावों के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें.

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Author: Deepak Mittal

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