अपहरण केस में पंजाब के IG को 8 महीने की जेल, वकील भी लपेटे में; क्या है मामला

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पंजाब की एक सीबीआई कोर्ट ने पुलिस महानिरीक्षक (IG) गौतम चीमा को अपहरण के एक मामले में आठ महीने की जेल की सजा सुनाई है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के साथ-साथ कोर्ट ने भारतीय रक्षा संपदा सेवा के अधिकारी अजय चौधरी और वकील वरुण उतरेजा को भी आठ-आठ महीने की जेल की सजा सुनाई है। यह मामला 2014 में घोषित अपराधी सुमेध गुलाटी के अपहरण और उसके ठिकानों पर अनाधिकार प्रवेश से जुड़े आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ा है।

यह केस गुलाटी के अवैध अपहरण से जुड़ा है, जिसे कथित तौर पर फेज-1 पुलिस स्टेशन से अस्पताल ले जाया गया था। गुलाटी उसी साल धोखाधड़ी के एक मामले में रियल एस्टेट एजेंट देविंदर गिल के साथ सह-आरोपी था। रियल एस्टेट कारोबारी रहे देविंदर सिंह गिल और उनकी पत्नी क्रिकपी खेड़ा ने आरोप लगाया था कि एक संयुक्त संपत्ति में लाभ-बंटवारे के विवाद के बाद आईजीपी चीमा ने उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज कराए थे।

याचिकाकर्ता की शिकायत के अनुसार, आईजी चीमा ने भगोड़े सुमेध गुलाटी को पुलिस हिरासत से जबरन अपनी गाड़ी में बैठाया था। इसके बाद वह उसे मोहाली के मैक्स अस्पताल लेकर गए, जहां एक महिला ने सुमेध गुलाटी से मारपीट की थी और उसे केस वापस लेने की धमकी भी दी थी। जब याचिकाकर्ता ने इस मामले को हाई कोर्ट के सामने रखा तो हाई कोर्ट ने इस केस की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा। सीबीआई ने आईजी चीमा को इस मामले में आरोपी बनाया था और चार्जशीट दाखिल की थी।

पिछले साल मई में सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने चीमा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 120-बी (आपराधिक साजिश) के साथ 452 (चोट पहुंचाने, हमला करने या गलत तरीके से रोकने की तैयारी के बाद अनाधिकार प्रवेश), 323 (हमला), 365 (अपहरण), 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना), 225 (किसी अन्य व्यक्ति को कानूनी रूप से पकड़ने में बाधा या प्रतिरोध), 186 (लोक सेवक के सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में बाधा डालना) और 506 (आपराधिक साजिश) के तहत आरोप तय किए थे।

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Author: Deepak Mittal

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