शैलेश शर्मा : घरघोड़ा! दीपावली जैसे बड़े त्यौहार के पास आते ही घरघोड़ा शहर को गत वर्षों की भांति भी क्या बारूद के रिस्क पर रखा जाएगा ये सवाल इस लिए उठ रहा है क्योंकि गत कई वर्षों से लगातार पटाखे की दुकानें बीच शहर में जय स्तम्भ चौक में लगाई जाती हैं जहां दिन भर भारी भीड़ विशेषकर त्यौहारों में उमड़ती है।
ऐसे में रिस्क लेकर पटाखा दुकानों का भरे बाजार संचालन कहीं से उचित नही जान पड़ता । जय स्तम्भ चौक नगर का हृदय स्थल होने के साथ शहर के मुख्य व्यावसायिक केंद्र भी है इस वजह से यहाँ पटाखा जैसे ज्वलनशील सामान का भंडारण व विपणन दुर्घटनाओं को न्यौता देने का काम है ।

बिना सुरक्षा उपायों के लगती हैं पटाखा दुकानें
घरघोड़ा के बीच बाजार सजने वाले पटाखा दुकानों को देखें तो सभी टेंट लगाकर पटाखों की दुकान लगाते है पर सुरक्षा उपाय के नाम पर एक आग बुझाने वाला छोटा सा सिलेंडर भी कहीं नजर नही आता । ऐसे में ईश्वर न करे यदि कभी आग लगने जैसी अनहोनी हुई तो लोगो की जान का जिम्मेदार कौन होगा इस पर सभी को सोचने की जरूरत है ।

प्रशासन कब तक बनेगा मूक दर्शक
इस गम्भीर विषय पर प्रशासन की अनदेखी अब शहर वासियों को अखरने लगी है । लोगो की जान की रिस्क पर शहर के बीच बाजार पटाखा दुकानें सजाने की बजाय प्रशासन को चाहिए कि पूर्ण सुरक्षा उपायो के साथ शहर के बाहरी खुले इलाको में पटाखे की दुकान लगवाए ताकि अनहोनी की किसी भी प्रकार की आशंकाओं को टाला जा सके । गत वर्षों तक इस मामले में मूकदर्शक की भूमिका में दिखे प्रशासन से इस बार उम्मीद है कि वह इस गम्भीर विषय मे बेरुखी का प्रदर्शन नही करेगी ।
Author: Deepak Mittal










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