जहाँ पहले नहीं थे शिक्षक, अब वहाँ नई रौशनी… नारायणपुर के सुदूर स्कूलों में शिक्षा की तस्वीर बदल रही है

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नारायणपुर: जहाँ कभी शिक्षक नहीं थे, वहाँ अब कक्षाओं में ज्ञान की आवाज़ गूंज रही है।
राज्य शासन के निर्देशों और कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं के नेतृत्व में नारायणपुर और ओरछा ब्लॉक के सैकड़ों बच्चों के भविष्य को संवारने वाला बड़ा कदम उठाया गया है।

जिले में अतिशेष शिक्षकों की काउंसिलिंग प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जिससे अब जिले के दुर्गम और पिछड़े क्षेत्रों के शिक्षकविहीन या एकल शिक्षक वाले स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक तैनात कर दिए गए हैं।

अब शिक्षा पहुंचेगी हर कोने में

जिले के 15 प्राथमिक और पूर्व-माध्यमिक स्कूल – जैसे मुरूमवाड़ा, धोबिनपारा, हिरंगई, तोयामेटा, मोहनार, गट्टाकाल, पदमेटा और कई अन्य दुर्गम क्षेत्रों में – अब शिक्षकविहीन नहीं रहे।

शिक्षा विभाग के अनुसार, 132 शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया, जिसमें:

  • 01 व्याख्याता (हायर सेकेंडरी)

  • 49 शिक्षक (पूर्व माध्यमिक शाला)

  • 10 प्रधानपाठक (प्राथमिक शाला)

  • 72 सहायक शिक्षक (प्राथमिक शाला) शामिल हैं।

 शुरू हुआ शिक्षा का नया अध्याय

बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल जो या तो एकल शिक्षक के भरोसे थे या पूरी तरह शिक्षकविहीन, अब वहाँ नए शिक्षक पदस्थ किए गए हैं।
108 एकल शिक्षक वाले प्राइमरी स्कूल और 05 माध्यमिक स्कूलों में भी अब शिक्षकों की संख्या संतुलित हो चुकी है।

स्कूलों जैसे जबगुंडा, थुलथुली, गोमागाल, तोयनार, रेकावाया, काकावाड़ा, पुंगारपाल, पुसवालपारा, हितवाड़ा और कई अन्य में अब कक्षाएं नियमित रूप से संचालित हो रही हैं।

 पालकों और शिक्षकों को भी मिली राहत

पहले जहाँ एक शिक्षक को कई स्कूलों में पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाती थी, अब वे अपने निर्धारित स्कूल में स्थायी रूप से पढ़ा सकेंगे। इससे बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और निरंतर मार्गदर्शन मिलेगा।

जिला शिक्षा अधिकारी रमेश कुमार निषाद ने बताया कि नया शिक्षा सत्र 2025 अब शिक्षकों की पूर्ण उपस्थिति के साथ प्रारंभ हो चुका है और यह निर्णय विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों के लिए भी लाभकारी साबित होगा।

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Author: Deepak Mittal

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