
काजल की कोठरी में कैसो भी जतन करो काजल का दाग भई लागे ही लागे
निर्मल अग्रवाल ब्यूरो प्रमुख मुंगेली : सरगांव- मूलभूत मानवीय आवश्यकताओं बिजली, पानी आदि से पहले ही ग्रसित ग्रामीण अब क्षेत्र में खुले बड़े बड़े कारखानों से फैलने वाले प्रदूषण, फसलों को नुकसान कर रहे काले डस्ट और बड़े बड़े वाहनों के आवाजाही से जर्जर हो चुके रोड व बढ़ती दुर्घटनाओं से बुरी तरह परेशान है । संबंधित विभागों को समस्याओं से अवगत कराने उपरांत भी निराकरण न होने को स्थिति ने आखिरकार फिर से रानी लक्ष्मीबाई को शस्त्र उठाने पे मजबूर कर दिया। नतीजन क्षेत्र की महिलाओं ने आज रोड में चक्काजाम कर दिया।

यह पूरा मामला है मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम रामबोर्ड व खम्हारडीह का जंहा स्थिति लगातर बदतर होते जा रही है बड़े बड़े गाड़ियों के आवागमन ने धूल के गुब्बार पैदा कर दिए है वंही फैक्टरियों की चिमनी से निकलने वाले काले धुंआ से फसलों पे जमने वाले नुकसानदायक कणों के चलते ग्रामीण काफी परेशान हो चुके है जिसकी काफी बार शिकायतों के बावजूद निराकरण न होने की स्थिति ने आज चक्काजाम की स्थिति निर्मित कर दी।
रामबोर्ड-खम्हारडीह ले रहा इंडस्ट्रियल एरिया का आकार
एक के बाद एक लगातार खुलते जा रही अरबों लागत की इन फैक्ट्रियों ने रामबोर्ड और खम्हारडीह ग्राम को पूरी तरह इंडस्ट्रियल एरिया में तब्दील कर दिया है। हालांकि इनके खुलने से एक तरफ जंहा रोजगार के नए आयाम खुले है वंही इनसे होने वाला प्रदूषण पर्यावरण के विषय मे गम्भीर और चिंतनीय है।
दो दिन पूर्व ही विषय पर हुई थी बैठक

17 अक्टूबर 2024 को रामबोर्ड खम्हारडीह के ग्रामीणों के साथ विषय की गम्भीरता को देखते हुए निराकरण करने हेतु तहसीलदार अतुल वैष्णव थाना प्रभारी सरगांव संतोष शर्मा ने अच्छी पहल करते हुए भाजपा मंडल अध्य्क्ष सरगांव कैलाश सिंह ठाकुर, महामंत्री पोषण यादव, नगर पंचायत अध्यक्ष सरगांव परमानन्द साहू , पूर्व न.प अध्यक्ष रामजुड़ावन साहू, पार्षद प्रतिनिधि विष्णु राजपूत, मनीष साहू, हल्का पटवारी के साथ ही पर्यावरण विभाग, संचालित फैक्ट्री के प्रतिनिधियों के बीच तहसील कार्यालय सरगांव में बैठक आयोजित की गई थी।
जंहा तहसीलदार अतुल वैष्णव ने सिलसिलेवार बिंदु तय कर समस्याओं को निराकृत करने पर्यावरण विभाग और फैक्टरी मैनेजरों को उचित निर्देश दिए।
बैठक में उपस्थित ग्रामीणों ने फैक्ट्री संचालको द्वारा उन्हें उचित पारिश्रमिक नही देने, भेदभाव करने, पर्यावरण विभाग के उनसे मिले होने , व फसलों के नुकसान की स्थिति में मुआवजा देने सहित काफी विषयो पे जोर दिया।
बरहाल देखने वाली बात तो यह है कि ग्रामीणों को समस्याओं से कब तक निजात मिल पायेगा या काजल की कोठरी में कैद काजल का दाग हमेशा लगता रहेगा।
Author: Deepak Mittal









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