ग्रामीणों का आक्रोश, सरपंच पर कार्रवाई न होने से उठे सवाल..

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रायगढ़, घरघोड़ा (शैलेश शर्मा): बैहामुडा ग्राम पंचायत में लाखों रुपये के भ्रष्टाचार का मामला सामने आने के बाद भी, सरपंच नृपत सिंह राठिया पर कोई कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। सचिव और रोजगार सहायक के खिलाफ तो कार्रवाई कर उन्हें जेल भेजा गया, लेकिन सरपंच पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे ग्रामीणों का विश्वास प्रशासन से उठता जा रहा है।

कलेक्टर को सौंपी दूसरी शिकायत:

पहले भी कई बार शिकायत और धरना-प्रदर्शन करने के बाद प्रशासन ने सरपंच के खिलाफ जांच शुरू की थी, जिसमें सरपंच की संलिप्तता की पुष्टि हो चुकी है। इसके बावजूद, सरपंच को अब तक बचाए रखने का आरोप ग्रामीण अधिकारियों पर लगा रहे हैं। इससे नाराज़ होकर ग्रामीणों ने एक बार फिर रायगढ़ कलेक्टर को शिकायत पत्र सौंपा है और त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

सरपंच के खिलाफ गंभीर आरोप:

सरपंच नृपत सिंह राठिया पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप हैं। जांच में यह साबित हुआ कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए न केवल लाखों का गबन किया, बल्कि अपने परिवार को वन पट्टे भी दिलवाए और अपनी पत्नी को पिंपरी तालाब की लीज दिलाने में भी हेरफेर किया। प्रशासन द्वारा इन सभी कृत्यों की पुष्टि होने के बावजूद सरपंच पर कार्रवाई न होना अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा है।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल:

ग्रामीणों का कहना है कि जब जांच में सरपंच की संलिप्तता सिद्ध हो चुकी है, तो अधिकारी कार्रवाई से क्यों बच रहे हैं? ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है और प्रशासन जानबूझकर मामले को लटका रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े आंदोलन का सहारा लेंगे।

अधिकारियों के बयान:

SDM घरघोड़ा रमेश कुमार मोर से बात करने पर उन्होंने कहा, “लोगों का बोलना उनका हक है, लेकिन जांच प्रक्रिया के तहत ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।” वहीं, खाद्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि “राशन घोटाले में सरपंच की भूमिका पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते क्योंकि दुकान संचालन ग्राम पंचायत सचिव और रोजगार सहायक द्वारा किया जा रहा था।”

अधूरी कार्रवाई से बढ़ा ग्रामीणों का आक्रोश:

ग्रामीणों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आधी-अधूरी कार्रवाई से उनका धैर्य जवाब दे रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन कब तक इस मामले पर चुप्पी साधे रहता है, या कलेक्टर की फटकार के बाद ही सरपंच पर कार्रवाई होती है।

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Author: Deepak Mittal

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