वॉशिंगटन: अमेरिका ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी है। यह फैसला वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने और पहले से समुद्र में मौजूद रूसी तेल की खेप को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के उद्देश्य से लिया गया है।
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार यह छूट केवल उन रूसी तेल शिपमेंट पर लागू होगी, जो 5 मार्च से पहले ही जहाजों पर लोड हो चुके थे। ऐसे शिपमेंट की बिक्री, डिलीवरी या ऑफलोडिंग से जुड़े आवश्यक ट्रांजैक्शन 4 अप्रैल तक अधिकृत रहेंगे।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह निर्णय अल्पकालिक और सीमित है, जिसका उद्देश्य वैश्विक तेल आपूर्ति को बाधित होने से बचाना है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस कदम से रूस को कोई विशेष आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि यह केवल पहले से ट्रांजिट में मौजूद शिपमेंट को ही मंजूरी देता है।
अमेरिका ने यह भी कहा कि भारत उसका एक महत्वपूर्ण साझेदार है और उम्मीद जताई है कि भविष्य में नई दिल्ली अमेरिकी तेल की खरीद भी बढ़ाएगी। ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी लाइसेंस के मुताबिक रूसी तेल की डिलीवरी केवल भारतीय बंदरगाहों पर की जा सकेगी और खरीदार भारत में पंजीकृत कंपनियां ही होंगी।
लाइसेंस के तहत जहाजों की डॉकिंग, एंकरिंग, क्रू सुरक्षा, आपात मरम्मत, बंकरिंग, पायलटिंग, बीमा और अन्य नियमित समुद्री सेवाओं से जुड़े कार्यों को भी अनुमति दी गई है, ताकि शिपमेंट सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।
अमेरिकी प्रशासन ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ रहा है। अधिकारियों ने कहा कि यह छूट रूस पर लगाए गए व्यापक प्रतिबंधों में कोई बड़ी ढील नहीं है और अन्य प्रतिबंधित लेन-देन पर पहले की तरह रोक जारी रहेगी।
गौरतलब है कि 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के बाद अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों ने रूस के वित्त, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे।
Author: Deepak Mittal










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