नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” व्यापार नीति और टैरिफ युद्ध ने भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को तेज़ी से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका द्वारा अपनाए गए संरक्षणवादी रुख ने दोनों पक्षों को अपने आर्थिक हित सुरक्षित करने के लिए करीब ला दिया।
अमेरिका की पत्रिका न्यूज़वीक की रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग दो दशकों तक चली रुक-रुक कर बातचीत के बाद यह समझौता दुनिया के दो सबसे बड़े बाजारों को जोड़ता है। इससे करीब दो अरब लोगों का मुक्त व्यापार क्षेत्र बनेगा, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग एक चौथाई का प्रतिनिधित्व करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका द्वारा स्टील, एल्यूमीनियम और अन्य भारतीय निर्यातों पर 25 से 50 प्रतिशत तक लगाए गए टैरिफ, साथ ही पिछले वर्ष अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता के विफल होने से नई दिल्ली को वैकल्पिक साझेदारियों की ओर तेजी से कदम बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं, यूरोपीय देशों पर भी अमेरिकी टैरिफ का दबाव बढ़ा, यहां तक कि ग्रीनलैंड को लेकर विवाद के दौरान यूरोप पर टैरिफ की धमकी भी दी गई थी।
एक यूरोपीय संघ के राजनयिक ने न्यूज़वीक से कहा कि ट्रंप के टैरिफ ने अंतिम दौर की बातचीत में “उपयोगी हवा” का काम किया और इससे भारत-ईयू के बीच लंबे समय से अटके मुश्किल मुद्दों को सुलझाने में मदद मिली। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने इस समझौते को वाशिंगटन के टैरिफ युद्धों का सीधा जवाब बताते हुए इसे “भू-राजनीतिक स्टेबलाइज़र” करार दिया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के संरक्षणवाद का अनुसरण करने के बजाय भारत और यूरोपीय संघ ने अब तक का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता करने का विकल्प चुना, जिससे यह संदेश गया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था किसी एक देश की नीति पर निर्भर नहीं रहेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने की रणनीति का भी हिस्सा है। भारत और यूरोपीय संघ दोनों ही आपूर्ति श्रृंखलाओं में चीन के प्रभुत्व और एशिया में उसके विस्तार को लेकर सतर्क हैं। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि रणनीतिक संबंधों को और मजबूत किया जाएगा और एकल स्रोतों पर निर्भरता घटाने पर जोर रहेगा।
इस समझौते के साथ भारत-ईयू सुरक्षा और रक्षा साझेदारी (SDP) भी की गई है, जो समुद्री सुरक्षा, रक्षा प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और आतंकवाद-रोधी सहयोग जैसे क्षेत्रों में तालमेल बढ़ाएगी। इसके अलावा, यह डील यूरोपीय कंपनियों के लिए बैटरी, स्पेशलिटी केमिकल्स जैसे अहम क्षेत्रों में उत्पादन भारत स्थानांतरित करने के अवसर भी खोलती है।
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस एफटीए को “इतिहास का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड डील” बताया। उन्होंने कहा कि इससे किसानों और छोटे व्यवसायों को निर्यात के नए अवसर मिलेंगे, जबकि उपभोक्ताओं को सस्ते उत्पाद उपलब्ध होंगे, जिससे भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी।
Author: Deepak Mittal










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