मुंबई: पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में तेज बिकवाली के चलते देश की टॉप-10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से नौ के कुल बाजार पूंजीकरण में भारी गिरावट दर्ज की गई। इन कंपनियों के मार्केट वैल्यूएशन में कुल ₹2,18,902 करोड़ की कमी आई। इस दौरान बीएसई सेंसेक्स 1,527.52 अंक यानी 1.84 प्रतिशत लुढ़क गया।
विश्लेषकों के मुताबिक, बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव और टेक्नोलॉजी शेयरों में कमजोरी ने निवेशकों के सेंटिमेंट पर असर डाला। वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के चलते लार्ज-कैप शेयरों में प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली।
Bharti Airtel में सबसे बड़ी गिरावट
टॉप कंपनियों में सबसे ज्यादा नुकसान भारती एयरटेल को हुआ। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹55,852 करोड़ घटकर करीब ₹10.71 लाख करोड़ रह गया।
बैंकिंग और ब्लूचिप शेयर भी दबाव में
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HDFC Bank की बाजार पूंजी ₹37,580 करोड़ घटी।
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Reliance Industries को ₹34,846 करोड़ का नुकसान हुआ, हालांकि यह अब भी देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है।
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Bajaj Finance का वैल्यूएशन ₹20,316 करोड़ घटा।
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Tata Consultancy Services (TCS) का मार्केट कैप ₹18,180 करोड़ कम हुआ।
इंश्योरेंस, इंफ्रा और बैंकिंग सेक्टर भी प्रभावित
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Life Insurance Corporation of India (LIC) की वैल्यूएशन ₹14,990 करोड़ घटी।
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Larsen & Toubro को ₹13,714 करोड़ का नुकसान हुआ।
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State Bank of India और ICICI Bank के मार्केट कैप में भी गिरावट दर्ज की गई।
Hindustan Unilever अकेली फायदे में
बाजार की कमजोरी के बीच हिंदुस्तान यूनिलीवर टॉप-10 कंपनियों में इकलौती ऐसी कंपनी रही, जिसने बढ़त दर्ज की। कंपनी का मार्केट वैल्यूएशन ₹5,462 करोड़ बढ़ा। इसे FMCG और कंजम्प्शन शेयरों में डिफेंसिव खरीदारी का संकेत माना जा रहा है।
आगे क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और निवेशकों की सतर्कता के चलते निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि दीर्घकालिक निवेशकों के लिए मौजूदा गिरावट को अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।
फिलहाल, बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी।
Author: Deepak Mittal










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