UP News: उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमा से सटे जिलों में योगी सरकार ने अवैध कब्जों और बिना अनुमति चल रहे धार्मिक स्थलों के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों पर शुक्रवार को भी यह अभियान जारी रहा.
प्रशासन ने बलरामपुर, बहराइच, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, पीलीभीत और महाराजगंज जिलों में अब तक कुल 205 अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की है.
इस कार्रवाई का मकसद सीमावर्ती इलाकों में शांति, कानून व्यवस्था और सरकारी जमीन की रक्षा करना है. जानकारी के अनुसार, इन जिलों में कई धार्मिक स्थल और मदरसे बिना किसी सरकारी मान्यता के चल रहे थे. इनमें से कई ऐसे स्थान भी थे, जो सार्वजनिक जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करके बनाए गए थे.
श्रावस्ती में सबसे ज्यादा 102 अवैध मदरसे सील
श्रावस्ती में अब तक 102 अवैध मदरसे चिह्नित किए गए, जिन्हें सील कर दिया गया है. वहीं, 5 मजारों में से 4 को हटाया गया है और एक मामले पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है. जिले में दो ईदगाह भी हटाई गई है. प्रशासन ने एक अन्य धार्मिक स्थल को नोटिस भेजा है.
महाराजगंज में 28 अवैध मदरसों और एक धार्मिक स्थल पर कार्रवाई हो चुकी है. यहां 5 मजारें हटाई गईं और एक ईदगाह को भी चिह्नित किया गया है. फरेंदा क्षेत्र में एक अवैध धार्मिक स्थल को कब्जेदार ने खुद हटा लिया है.
बहराइच में 13 मदरसे चिन्हित, 5 सील, 8 हटाए गए
बहराइच जिले में 13 अवैध मदरसों में से 5 को सील किया गया है और 8 हटाए गए हैं. इसके अलावा, 8 धार्मिक स्थलों में से 2 को हटाया गया और शेष को नोटिस भेजा गया है. 2 मजारों में से एक को हटाया गया है, और एक ईदगाह को नोटिस दी गई है.
बलरामपुर जिले में 28 मदरसों पर कार्रवाई हुई है. इनमें से 22 को सील और 5 को हटाया गया है. वहीं, 10 मजारों में से 8 को हटाया गया है और 2 को नोटिस भेजा गया है. यहां एक ईदगाह को भी हटाया गया है.
सिद्धार्थनगर में नेपाल सीमा के 10 किमी क्षेत्र में 22 अतिक्रमण चिह्नित हुए हैं. इनमें 18 मदरसे और 4 धार्मिक स्थल शामिल हैं. 9 मदरसे हटाए गए और 5 को सील कर दिया गया है. पीलीभीत में अभी तक केवल 1 अवैध धार्मिक स्थल सामने आया है, जिसे नोटिस दिया गया है.
क्यों जरूरी है ये अभियान?
उत्तर प्रदेश के कई सीमावर्ती इलाके वर्षों से अवैध कब्जों की समस्या से जूझते रहे हैं. खासकर नेपाल सीमा के नजदीक ये गतिविधियां सुरक्षा के लिहाज से भी संवेदनशील मानी जाती हैं. ऐसे इलाकों में अवैध मदरसे और धार्मिक स्थल स्थानीय शांति और प्रशासनिक नियंत्रण में बाधा बन सकते हैं.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि राज्य में अवैध कब्जे और बिना मान्यता के धार्मिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सरकार की मंशा है कि सभी धार्मिक संस्थान और शिक्षण केंद्र कानूनी दायरे में रहें और किसी भी तरह की अराजकता न फैलने पाये.
Author: Deepak Mittal










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