टाउन प्लानिंग का शिकंजा: बिलासपुर में अनंत रियल्टी की विकास अनुज्ञा निरस्त

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स्वीकृत अभिन्यास की भूमि को बिना संशोधन पहुंच मार्ग के रूप में इस्तेमाल करने पर आपत्ति, प्रकोष्ठों की संख्या में भी मिली विसंगति

बिलासपुर। अज्ञेय नगर स्थित बहुमंजिला आवासीय प्रोजेक्ट में कथित अनियमितताओं के मामले में नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय ने कड़ा कदम उठाते हुए मेसर्स अनंत रियल्टी की विकास अनुज्ञा निरस्त कर दी है। भागीदार नमन गोयल के माध्यम से जारी विकास अनुज्ञा क्रमांक 1456 को छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 के नियम 25 के तहत प्रतिसंहृत किया गया है।

जानकारी के अनुसार 25 जून 2025 को जारी विकास अनुज्ञा के संबंध में संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश, बिलासपुर ने निरस्तीकरण का प्रस्ताव भेजा था। इसके बाद संस्था को अपना पक्ष और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। 31 जुलाई 2026 को सुनवाई के दौरान संस्था ने 15 दिन का अतिरिक्त समय मांगा। इसके बाद 7 अगस्त को नमन गोयल ने उपस्थित होकर जवाब और दस्तावेज प्रस्तुत किए। जांच समिति ने प्रस्तुत जवाबों और दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद प्रकरण में कई विसंगतियां पाईं।

पहुंच मार्ग को लेकर सवाल

जांच में सामने आया कि जिस भूमि का इस्तेमाल प्रोजेक्ट के पहुंच मार्ग के रूप में किया जा रहा था, वह पूर्व में स्वीकृत अभिन्यास का हिस्सा थी। समिति के अनुसार, इस भूमि को नए विकास में शामिल करने से पहले पूर्व स्वीकृत अभिन्यास में नियमानुसार संशोधन किया जाना आवश्यक था, लेकिन निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

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60 की अनुमति, नक्शे में 90 प्रकोष्ठ

प्रकरण में दूसरी महत्वपूर्ण विसंगति प्रकोष्ठों की संख्या से जुड़ी पाई गई। विकास अनुज्ञा में 15 ब्लॉक, प्रत्येक में चार तल और प्रत्येक तल पर एक प्रकोष्ठ के हिसाब से कुल 60 प्रकोष्ठ प्रस्तावित थे। वहीं स्वीकृत मानचित्र के कुछ हिस्सों में छह तल दर्शाए गए हैं। इससे कुल प्रकोष्ठों की संख्या 90 तक पहुंचती है। आदेश में कहा गया है कि इसका असर EWS और LIG वर्ग के लिए निर्धारित प्रकोष्ठों की गणना पर भी पड़ता है।

संस्था की ओर से इसे सलाहकार द्वारा हुई लिपिकीय नंबरिंग त्रुटि बताया गया। हालांकि, जांच समिति ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। समिति ने कहा कि स्वीकृति से पहले अभिन्यास पर आवेदक के हस्ताक्षर होते हैं, इसलिए उसमें दर्ज विवरण की जिम्मेदारी से संस्था अलग नहीं हो सकती।

आर्किटेक्ट, पार्किंग और ओपन स्पेस पर भी सवाल

जांच प्रक्रिया से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, प्रोजेक्ट से संबंधित प्रक्रियाओं में कथित रूप से इस्तेमाल किए गए आर्किटेक्ट की वैधता, EWS/LIG दायित्वों से जुड़े शपथ-पत्र, पहुंच मार्ग की चौड़ाई, पार्किंग और ओपन स्पेस से संबंधित पहलुओं पर भी सवाल उठे हैं। सूत्रों ने स्वीकृतियां प्राप्त करने के दौरान कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को कथित तौर पर छिपाने अथवा गलत तरीके से प्रस्तुत किए जाने का दावा किया है।

हालांकि, ये सभी आरोप तीन पृष्ठ के अंतिम निरस्तीकरण आदेश में स्वतंत्र निष्कर्ष के रूप में दर्ज नहीं हैं। इसलिए इनका उल्लेख आधिकारिक सूत्रों के दावे के रूप में किया जा रहा है।

कई विभागों को भेजी गई आदेश की प्रतियां

विकास अनुज्ञा निरस्त किए जाने के अंतिम आदेश की प्रतियां आवास एवं पर्यावरण विभाग, बिलासपुर कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CG RERA), अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश और उप पंजीयक सहित संबंधित अधिकारियों को सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई हैं।

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Author: Deepak Mittal

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