जे के मिश्र / बिलासपुर – छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में फ्लोराइड युक्त पानी के मामले को लेकर राज्य के पीएचई सचिव ने हाईकोर्ट में विस्तृत रिपोर्ट पेश की है। इसमें उन्होंने साफ पानी की आपूर्ति के लिए की जा रही सरकारी कोशिशों की जानकारी दी। हाईकोर्ट ने इस रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया है कि प्रदेश के हर नागरिक को साफ और सुरक्षित पानी उपलब्ध कराना शासन का कर्तव्य है और इस प्रक्रिया की मॉनिटरिंग की जाएगी। कोर्ट ने गरियाबंद के साथ-साथ पूरे राज्य में स्वच्छ जल आपूर्ति की आवश्यकता पर जोर दिया है।
गरियाबंद में फ्लोराइड युक्त पानी से स्वास्थ्य चिंताएं
गरियाबंद जिले के कई गांवों में पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा पाए जाने से बच्चों में डेंटल फ्लोरोसिस जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। इस समस्या पर कोर्ट ने चिंता जताते हुए विभागीय अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा था। पीएचई सचिव ने अपने जवाब में बताया कि गांवों में लगातार स्वास्थ्य शिविर और इलाज की सुविधा दी जा रही है। रिपोर्ट में बताया गया कि पानी में फ्लोराइड की मात्रा आठ गुना नहीं बल्कि अधिकतम तीन गुना अधिक है।
कोर्ट के निर्देश: स्वच्छ जल उपलब्ध कराना है शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी
कोर्ट ने इस गंभीर समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि फ्लोराइड युक्त पानी से होने वाली बीमारियों को रोकना और सुरक्षित पानी उपलब्ध कराना राज्य शासन की प्रमुख जिम्मेदारी है। कोर्ट ने पीएचई सचिव को निर्देशित किया कि वे शपथ पत्र के माध्यम से बताए कि इस दिशा में क्या-क्या ठोस उपाय किए जा रहे हैं और कब तक इनका समाधान हो सकेगा।
पूरे प्रदेश में स्वच्छ पानी की जरूरत पर जोर
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ गरियाबंद ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में स्वच्छ जल की उपलब्धता पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके लिए सरकार को व्यापक स्तर पर काम करने की आवश्यकता है ताकि प्रदेशभर में जलजनित बीमारियों से बचाव किया जा सके और लोगों को स्वस्थ जीवन प्रदान किया जा सके।
Author: Deepak Mittal










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