ग्रीन कार्ड का सपना बना डरावना सच! 30 साल अमेरिका में रहीं महिला इंटरव्यू देने पहुंचीं, ICE ने पकड़कर डिटेंशन सेंटर भेजा

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Deepak Mittal

अमेरिका: अमेरिका में करीब 30 साल से रह रही 60 वर्षीय भारतीय मूल की महिला बाबलजीत ‘बबली’ कौर के लिए ग्रीन कार्ड का इंटरव्यू एक भयानक मोड़ ले आया। ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के तहत बायोमेट्रिक अपॉइंटमेंट के लिए पहुंचीं कौर को ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) ने वहीं से हिरासत में ले लिया।

परिजनों के मुताबिक, जब बबली कौर ICE कार्यालय के फ्रंट डेस्क पर मौजूद थीं, तभी अचानक कई संघीय एजेंट अंदर आए। उन्हें एक कमरे में बुलाया गया और कुछ ही देर में गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें वकील से बात करने की अनुमति तो दी गई, लेकिन इसके बावजूद हिरासत में रखा गया।

घंटों तक परिवार को नहीं थी कोई खबर

कौर की बेटी जोति ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद कई घंटों तक परिवार को यह भी नहीं पता था कि उनकी मां को कहां ले जाया गया है। बाद में जानकारी मिली कि उन्हें एडेलान्तो डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया है—जो पहले एक संघीय जेल थी और अब ICE द्वारा इस्तेमाल की जाती है।

स्थानीय समुदाय में मची चिंता

बाबलजीत कौर का परिवार पहले लगुना बीच में बसा था और बाद में लॉन्ग बीच के बेलमोंट शोर इलाके में रहने लगा। उनके तीन बच्चे हैं—एक बेटी जोति, जिनकी स्थिति DACA के तहत है, और दो बच्चे जो अमेरिकी नागरिक हैं।

कौर और उनके पति ने करीब 20 साल तक ‘नटराज क्युइज़िन ऑफ इंडिया एंड नेपाल’ नाम से रेस्तरां चलाया, जो इलाके में काफी लोकप्रिय रहा। इसके अलावा, कौर 25 वर्षों तक राइट ऐड में भी काम कर चुकी हैं। हाल ही में वे दोबारा रेस्तरां में काम शुरू करने की तैयारी कर रही थीं।

डिटेंशन सेंटर के हालात ने बढ़ाई बेचैनी

परिवार ने बताया कि एडेलान्तो सेंटर में कौर को बड़े डार्म-स्टाइल कमरे में रखा गया है, जहां कई अन्य कैदी भी मौजूद हैं। वहां 24 घंटे लाइट जलती रहती है और शोर इतना है कि सोना मुश्किल हो जाता है।

जोति ने भावुक होते हुए कहा,

“यह किसी बुरे सपने जैसा है… हम उन्हें बाहर निकालने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। उनका वहां होना बिल्कुल गलत है। यह अमानवीय है।”

नेताओं और वकीलों की पहल

लॉन्ग बीच के डेमोक्रेटिक कांग्रेसी रोबर्ट गार्सिया ने बबली कौर की रिहाई की मांग की है और परिवार के वकीलों के संपर्क में हैं। हालांकि, परिजनों को उनसे मिलने के लिए पूरे दिन इंतजार करना पड़ता है और मुलाकात भी बेहद सीमित समय के लिए ही हो पाती है।

30 साल अमेरिका में रहकर टैक्स देने, काम करने और समुदाय का हिस्सा बनने वाली महिला की गिरफ्तारी ने न सिर्फ परिवार को झकझोर दिया है, बल्कि अमेरिका की इमिग्रेशन प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या बबली कौर को जल्द आज़ादी मिल पाएगी या यह कानूनी लड़ाई और लंबी चलेगी।

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Author: Deepak Mittal

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