बांदा POCSO अदालत का कड़ा फैसला: 33 बच्चों के यौन शोषण मामले में पति-पत्नी को मौत की सजा

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नई दिल्ली/बांदा: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की विशेष POCSO अदालत ने बच्चों के यौन शोषण के बेहद गंभीर मामले में आरोपी रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों को भारतीय दंड संहिता (IPC) और POCSO अधिनियम के तहत विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया।

जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) के अनुसार, अदालत ने राज्य सरकार को प्रत्येक पीड़ित को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही आरोपियों के घर से जब्त की गई नकदी को पीड़ितों में समान रूप से वितरित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

2010 से 2020 के बीच सक्रिय रहे आरोपी

सीबीआई ने 31 अक्टूबर 2020 को इस मामले में केस दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि आरोपी 2010 से 2020 के बीच बांदा और चित्रकूट के आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय रहे। आरोप है कि उन्होंने 33 नाबालिग लड़कों का सुनियोजित यौन शोषण किया, जिनमें कुछ की उम्र मात्र तीन वर्ष थी।

एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने बच्चों का अश्लील उद्देश्यों के लिए उपयोग किया और इंटरनेट पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) का निर्माण व प्रसार किया। कई पीड़ितों को शारीरिक चोटें आईं, जबकि कुछ अब भी मानसिक आघात से जूझ रहे हैं।

लालच देकर फंसाते थे बच्चे

मुख्य आरोपी रामभवन सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत था। जांच में पाया गया कि वह बच्चों को ऑनलाइन वीडियो गेम की पहुंच, पैसे और उपहार का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था।

‘दुर्लभतम’ श्रेणी में रखा मामला

सीबीआई ने 10 अक्टूबर 2021 को आरोप पत्र दाखिल किया और 26 मई 2023 को आरोप तय हुए। अदालत ने फैसले में कहा कि अपराध की सुनियोजित प्रकृति, व्यापकता और क्रूरता को देखते हुए यह मामला “दुर्लभतम” की श्रेणी में आता है।

अदालत ने टिप्पणी की कि कई जिलों में फैले इस जघन्य अपराध और दोषियों के नैतिक पतन को देखते हुए सुधार की कोई संभावना नहीं है, इसलिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए कठोरतम दंड आवश्यक है।

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Author: Deepak Mittal

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