भारत में चीनी स्मार्टफोन कंपनियों को झटका, बाजार हिस्सेदारी में गिरावट

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नई दिल्ली: भारत के स्मार्टफोन बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। करीब एक दशक बाद पहली बार चीनी ब्रांड्स की कमाई और मार्केट शेयर में गिरावट दर्ज की गई है। उद्योग रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 के दौरान इन कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ निगेटिव रही है।

इन ब्रांड्स की बिक्री घटी

गिरावट का असर खासतौर पर Xiaomi, Oppo, Realme और OnePlus जैसे बड़े नामों पर पड़ा है।

डेटा के अनुसार, भारत के स्मार्टफोन बाजार में चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी 2023 में लगभग 54 प्रतिशत थी, जो अब घटकर करीब 48 प्रतिशत रह गई है। यानी अब हर दो में से एक फोन चीनी ब्रांड का नहीं रहा।

क्यों गिर रहा है मार्केट शेयर?

विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय उपभोक्ता पिछले दो वर्षों में प्रीमियम और ब्रांड वैल्यू वाले स्मार्टफोन्स की ओर शिफ्ट हुए हैं। खासकर 30,000 रुपये से ऊपर के सेगमेंट में Apple और Samsung की बिक्री में तेजी आई है।

एंट्री-लेवल और मिड-रेंज सेगमेंट में मार्जिन कम होना भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। पहले चीनी कंपनियां कम कीमत में बड़े पैमाने पर बिक्री कर बाजार पर कब्जा करती थीं, लेकिन अब उसी सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है।

‘मेक इन इंडिया’ और लोकल मैन्युफैक्चरिंग का असर

सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ नीति और स्थानीय निर्माण पर जोर का भी बाजार पर प्रभाव पड़ा है। साथ ही, भारतीय ब्रांड्स और पुराने अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी आक्रामक ऑफर्स के साथ बाजार में सक्रिय हैं।

प्रीमियम सेगमेंट में चुनौती

हालांकि Xiaomi और Oppo ने प्रीमियम मॉडल लॉन्च किए हैं, लेकिन उन्हें अभी तक वैसी ब्रांड ट्रस्ट नहीं मिल पाई है जैसी Apple और Samsung को हासिल है। OnePlus की पहचान प्रीमियम सेगमेंट में जरूर है, मगर कुल बिक्री पर असर देखने को मिला है।

आगे की राह

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर चीनी कंपनियां केवल सस्ते स्मार्टफोन्स पर निर्भर रहीं तो आने वाले समय में चुनौतियां और बढ़ेंगी। उन्हें भारत में अधिक निवेश, लोकल मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार, बेहतर आफ्टर-सेल्स सर्विस और लंबी सॉफ्टवेयर सपोर्ट पर फोकस करना होगा।

हालांकि जानकार यह भी मानते हैं कि मजबूत सप्लाई चेन और बड़े यूजर बेस के कारण चीनी कंपनियां इतनी आसानी से बाजार से बाहर नहीं होंगी। आने वाले महीनों में नई रणनीति के साथ उनकी वापसी की कोशिशें तेज हो सकती हैं।

फिलहाल इतना तय है कि भारत का स्मार्टफोन बाजार तेजी से बदल रहा है और प्रतिस्पर्धा पहले से ज्यादा कड़ी हो चुकी है।

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Author: Deepak Mittal

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