सौम्या चौरसिया, जो छत्तीसगढ़ की पूर्व मुख्यमंत्री की उपसचिव रह चुकी हैं, को कोल लेवी वसूली मामले में हाईकोर्ट से एक बार फिर झटका लगा है।
उनकी तीसरी बार दायर की गई जमानत याचिका को बिलासपुर हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। यह फैसला जस्टिस एन के व्यास की सिंगल बेंच ने सुनाया है।
इस मामले में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने सौम्या चौरसिया के साथ आईएएस अधिकारी समीर बिश्नोई, रानू साहू, और अन्य को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि कोल कारोबारियों से परिवहन और पीट पास जारी करने के बदले प्रति टन की दर से वसूली की जाती थी।
जो कारोबारी यह राशि नहीं चुकाते थे, उन्हें परिवहन पास जारी नहीं किया जाता था। इस सिंडिकेट के प्रमुख कारोबारी सूर्यकांत तिवारी माने जाते हैं, जिन्हें कथित रूप से सौम्या चौरसिया का संरक्षण प्राप्त था।
इसके अलावा, ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) ने भी अपनी जांच में सौम्या चौरसिया और उनके परिवार द्वारा आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया है। वे पिछले डेढ़ साल से जेल में बंद हैं.
और इससे पहले उनकी दो जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा अन्य आरोपियों को जमानत मिलने के आधार पर उन्होंने तीसरी बार जमानत की मांग की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
Author: Deepak Mittal










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