अमेरिकी अदालतों से इमिग्रेशन डिटेंशन में बंद भारतीयों को राहत, कई मामलों में बॉन्ड सुनवाई के आदेश

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

वाशिंगटन: अमेरिका की विभिन्न जिला अदालतों ने इस सप्ताह इमिग्रेशन डिटेंशन में रखे गए कई भारतीय नागरिकों को राहत देते हुए बॉन्ड सुनवाई या तत्काल रिहाई के आदेश जारी किए हैं। ये फैसले कैलिफोर्निया, मिशिगन, न्यूयॉर्क और ओक्लाहोमा की अदालतों से आए हैं।

न्यायाधीशों ने माना कि इमिग्रेशन अधिकारियों ने कुछ मामलों में गलत डिटेंशन कानून लागू किया या पर्याप्त ‘ड्यू प्रोसेस’ का पालन नहीं किया।

कैलिफोर्निया: हरबीत सिंह को बॉन्ड सुनवाई

सैन डिएगो स्थित अदालत ने हरबीत सिंह की याचिका स्वीकार करते हुए सात दिनों के भीतर व्यक्तिगत बॉन्ड सुनवाई कराने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि बिना बॉन्ड सुनवाई के लंबी हिरासत अनुचित है और विधिक प्रक्रिया का उल्लंघन है।

एक अन्य मामले में अदालत ने भवानदीप सिंह ढालीवाल की तत्काल रिहाई का आदेश देते हुए अधिकारियों को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के दोबारा गिरफ्तार करने से भी रोका।

सैन डिएगो के ही एक अलग मामले में कोर्ट ने विक्रांत सिंह को उनकी पूर्व रिहाई की शर्तों के तहत इमिग्रेशन कस्टडी से तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया।

मिशिगन: सागर राम को सशर्त राहत

मिशिगन के वेस्टर्न डिस्ट्रिक्ट की अदालत ने सागर राम को राहत देते हुए पांच कार्यदिवसों के भीतर धारा 1226(ए) के तहत बॉन्ड सुनवाई कराने या तत्काल रिहाई का आदेश दिया। न्यायाधीश ने सरकार के इस दावे को खारिज कर दिया कि उन पर अनिवार्य डिटेंशन लागू होता है।

हालांकि, मिशिगन में ही गुरप्रीत वालिया सिंह की हैबियस याचिका खारिज कर दी गई। अदालत ने माना कि उन्हें पहले ही हिरासत की पुनर्समीक्षा मिल चुकी है और उनकी हिरासत कानून या संविधान का उल्लंघन नहीं करती।

ओक्लाहोमा: करनदीप सिंह को राहत

ओक्लाहोमा की एक अदालत ने करनदीप सिंह के मामले में कहा कि उनकी हिरासत धारा 1226(ए) के तहत आती है, जो बॉन्ड की अनुमति देती है, न कि धारा 1225(बी)(2) के अनिवार्य हिरासत प्रावधान के अंतर्गत। कोर्ट ने तुरंत बॉन्ड सुनवाई का आदेश दिया।

हालांकि, एक अन्य मामले में ओक्लाहोमा की अदालत ने मजिस्ट्रेट जज की सिफारिश को स्वीकार करते हुए बॉन्ड न दिए जाने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।

न्यूयॉर्क: 5वें संशोधन का हवाला

न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन स्थित अदालत ने हरमनप्रीत सिंह को हैबियस राहत देते हुए नई बॉन्ड सुनवाई का आदेश दिया। न्यायाधीश ने कहा कि उचित सुरक्षा उपायों के बिना लगातार हिरासत में रखना अमेरिकी संविधान के 5वें संशोधन का उल्लंघन है।

अदालतों ने स्पष्ट किया कि सरकार को ठोस और स्पष्ट साक्ष्य के आधार पर यह साबित करना होगा कि संबंधित व्यक्ति के फरार होने या समुदाय के लिए खतरा बनने का वास्तविक जोखिम है।

इन फैसलों को अमेरिका में इमिग्रेशन डिटेंशन नीतियों की न्यायिक समीक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Comment

Leave a Comment