नई दिल्ली: देश के छोटे और मझोले उद्योगों (MSME) को राहत देने के लिए सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है। अब MSME सेक्टर के उद्यमियों को सस्ते और आसानी से लोन मिल सकेंगे, जिससे कारोबार को बढ़ावा मिलेगा और वित्तीय दबाव कम होगा।
बाहरी बेंचमार्क से जुड़े होंगे MSME लोन
RBI ने बैंकों को MSME लोन को बाहरी बेंचमार्क से जोड़ने की सलाह दी है। सरकार ने संसद में जानकारी दी कि ऐसे लोन की ब्याज दर हर तीन महीने में रीसेट होगी।
इससे ब्याज दरों में कटौती का फायदा तुरंत कर्जदारों तक पहुंचेगा।
इसके साथ ही पुराने कर्जदारों को भी आपसी सहमति से नए सिस्टम में स्विच करने का विकल्प दिया जाएगा।
क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) में बड़ी राहत
सरकार ने MSME के घरेलू उत्पादन को प्रभावित होने से बचाने के लिए क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) में कई अहम छूट दी हैं—
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माइक्रो उद्यमों को 6 महीने की अतिरिक्त मोहलत
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छोटे उद्यमों को 3 महीने की अतिरिक्त समय-सीमा
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निर्यात के लिए आवश्यक कच्चे माल के सीमित आयात में राहत
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R&D के लिए विशेष आयात की अनुमति
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पुराने स्टॉक की निकासी में छूट
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BIS फीस में माइक्रो, स्मॉल और मीडियम उद्यमों को भारी रियायत
म्यूचुअल क्रेडिट गारंटी स्कीम से बिना गारंटी लोन
MSME के लिए म्यूचुअल क्रेडिट गारंटी स्कीम को भी लागू किया गया है। इसके तहत—
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माइक्रो और स्मॉल इकाइयों को
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10 लाख रुपये तक का लोन बिना किसी गिरवी के मिलेगा
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मशीनरी और उपकरण खरीदना होगा आसान
कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार
सरकार का कहना है कि इन फैसलों से MSME सेक्टर को वित्तीय मजबूती, कम ब्याज दर पर कर्ज, और सरल प्रक्रियाओं का लाभ मिलेगा।
यह कदम खासतौर पर उन छोटे उद्यमियों के लिए राहतभरा साबित होगा, जो अब तक ऊंची ब्याज दरों और जटिल लोन प्रक्रियाओं के कारण अपने कारोबार का विस्तार नहीं कर पा रहे थे।
Author: Deepak Mittal










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