नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में नाबालिग लड़कियों के लापता होने के मामले लगातार पुलिस की चिंता बढ़ा रहे हैं। हाल के दिनों में सामने आए दो मामलों ने न सिर्फ परिवारों को झकझोर दिया, बल्कि सोशल मीडिया पर पनप रहे कच्चे प्यार की खतरनाक सच्चाई भी उजागर कर दी। Instagram पर शुरू हुई दोस्ती और “गुल्लू-गुल्लू” का अंजाम घर से फरारी तक पहुंच गया।
दिल्ली पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) और क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि दोनों मामलों में भावनात्मक कमजोरी, सोशल मीडिया का प्रभाव और माता-पिता से संवाद की कमी अहम वजह बनी।
मामला-1: मां की डांट, फर्जी फेयरवेल नोट और गुमशुदगी का ड्रामा
भलस्वा डेयरी इलाके की रहने वाली 11वीं कक्षा की 16 वर्षीय छात्रा 9 दिसंबर 2025 को अचानक लापता हो गई। परिजनों ने अपहरण की आशंका जताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
जांच के दौरान चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। घर के काम को लेकर मां की हल्की डांट से नाराज़ छात्रा ने सुसाइड नोट जैसा फर्जी फेयरवेल लेटर लिख दिया, ताकि परिवार को लगे कि उसने जान दे दी है।
असल में वह अपने एक दोस्त के घर जाकर छिप गई थी और वहां झूठ बोला कि उसकी नानी का निधन हो गया है और पूरा परिवार गांव चला गया है। पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस के जरिए उसे समता विहार से सुरक्षित बरामद कर लिया।
मामला-2: Instagram का जाल, प्यार का भ्रम और रेलवे स्टेशन तक की दौड़
दूसरा मामला निहाल विहार इलाके का है, जहां 15 साल की किशोरी 21 दिसंबर को लापता हुई। जांच में सोशल मीडिया का खतरनाक पहलू सामने आया।
किशोरी Instagram पर गौरव नाम के लड़के के संपर्क में आई और उसके प्रभाव में आकर बिना बताए घर छोड़ दिया। वह दिल्ली से बाहर भागने की तैयारी कर रही थी।
इंस्पेक्टर मुकेश कुमार की टीम ने कॉल डिटेल्स और लोकेशन ट्रैक कर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से उसे उस वक्त पकड़ लिया, जब वह शहर छोड़ने वाली थी।
पुलिस की चेतावनी: कच्चा प्यार बन रहा बड़ा खतरा
डीसीपी (क्राइम ब्रांच) पंकज कुमार ने बताया कि दोनों नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया है, लेकिन यह घटनाएं अभिभावकों के लिए गंभीर चेतावनी हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखना, उनसे खुलकर बातचीत करना और भावनात्मक सहारा देना बेहद जरूरी है।
सबक: स्क्रीन के पीछे छुपा खतरा
इन मामलों ने साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया पर बनने वाले रिश्ते नाबालिगों के लिए कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं। एक पल की भावनात्मक कमजोरी, थोड़ी-सी डांट और मोबाइल की स्क्रीन… और बच्चे ऐसा कदम उठा लेते हैं, जो पूरे परिवार को सदमे में डाल देता है।
Author: Deepak Mittal










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