प्रियंका गांधी से मिले प्रशांत किशोर …… कांग्रेस में वापसी या नई सियासी रणनीति की तैयारी

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नई दिल्ली/पटना: बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के एक महीने बाद जन सुराज पार्टी के नेता और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) को लेकर सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। वजह है उनकी कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा से हुई मुलाकात। इस मुलाकात के बाद एक बार फिर अटकलें लगने लगी हैं कि क्या प्रशांत किशोर कांग्रेस की ओर वापसी का मन बना रहे हैं या फिर किसी नई राजनीतिक रणनीति की जमीन तैयार हो रही है।

सूत्रों के मुताबिक, यह मुलाकात पिछले सप्ताह सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर हुई, जहां दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई। हालांकि कांग्रेस और जन सुराज पार्टी—दोनों ही इस मुलाकात के महत्व को कम करके आंक रहे हैं। संसद परिसर में जब प्रियंका गांधी से इस बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने हल्के अंदाज में कहा, “ये भी कोई न्यूज है क्या?” लेकिन राजनीतिक हलकों में इस मुलाकात के मायने गहराई से निकाले जा रहे हैं।

कांग्रेस से पुराने रिश्ते, कड़वाहट भरा अलगाव

प्रशांत किशोर के कांग्रेस से रिश्ते नए नहीं हैं। 2021 में जदयू छोड़ने के बाद वे कांग्रेस से जुड़े थे और 2022 में पार्टी के पुनर्गठन के लिए एक ब्लू प्रिंट भी तैयार किया था। हालांकि पार्टी के भीतर पद और अधिकार को लेकर मतभेद इतने बढ़े कि दोनों के रास्ते अलग हो गए। पीके ने उस समय कांग्रेस से कड़वाहट के साथ नाता तोड़ा और बाद में पार्टी के आलोचक बन गए।

बिहार चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी की रणनीतियों पर सवाल उठाए थे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण जैसे मुद्दों को चुनावी एजेंडा मानने से इनकार किया था।

बिहार चुनाव में जन सुराज की करारी हार

बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने त्रिकोणीय मुकाबले का दावा किया था, लेकिन नतीजे बिल्कुल उलट रहे। पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी। कुल 238 उम्मीदवारों में से 236 (99.16%) की जमानत जब्त हो गई। यह प्रदर्शन पीके के राजनीतिक करियर के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

कांग्रेस का भी कमजोर प्रदर्शन

उधर कांग्रेस के लिए भी बिहार चुनाव निराशाजनक साबित हुए। पार्टी ने 243 में से 61 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन सिर्फ 6 सीटों पर जीत हासिल कर सकी। जबकि 2020 में कांग्रेस ने 19 सीटें जीती थीं। ऐसे में पार्टी के भीतर भी आत्ममंथन का दौर चल रहा है।

नई सियासी खिचड़ी के संकेत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बदले हुए हालात में प्रशांत किशोर और कांग्रेस दोनों ही नए विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। ऐसे में प्रियंका गांधी से मुलाकात को महज शिष्टाचार नहीं माना जा रहा। हालांकि अभी तक इस मुलाकात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि बातचीत जरूर हुई है और किसी नई सियासी रणनीति की नींव रखी जा सकती है।

अब सवाल यही है—
क्या प्रशांत किशोर तीन साल बाद कांग्रेस में वापसी करेंगे?
या फिर पर्दे के पीछे कोई नई राजनीतिक खिचड़ी पक रही है, जिसका स्वाद आने वाले दिनों में देश की राजनीति चखेगी?

फिलहाल जवाब भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इतना तय है कि यह मुलाकात आने वाले सियासी घटनाक्रमों की आहट जरूर दे रही है।

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Author: Deepak Mittal

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