मुंबई: बद्रीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) द्वारा चार धाम मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के ऐलान के बाद राजनीतिक गलियारों में विवाद गहराता जा रहा है। इस फैसले पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता मजीद मेमन ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ बताया है।
मजीद मेमन ने मंगलवार को समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि यदि कोई राज्य सरकार या उससे जुड़ी संस्था ऐसा निर्णय लेती है, जो नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों से टकराता है, तो वह फैसला लंबे समय तक टिक नहीं सकता। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और धार्मिक पहचान के आधार पर इस तरह की पाबंदियां संवैधानिक कसौटी पर कमजोर साबित हो सकती हैं।
टीएमसी नेता ने आगे कहा कि आमतौर पर ऐसे प्रतिबंधों के पीछे स्पष्ट कानूनी आधार और ठोस शर्तें होनी चाहिए। केवल धर्म के आधार पर किसी वर्ग को सार्वजनिक धार्मिक स्थलों में प्रवेश से रोकना कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यदि इस फैसले को अदालत में चुनौती दी जाती है, तो न्यायालय इसे पलट सकता है।
गौरतलब है कि बद्रीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने हाल ही में घोषणा की है कि उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी मंदिरों में केवल हिंदुओं को ही प्रवेश की अनुमति होगी। इस फैसले में बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम सहित अन्य मंदिर भी शामिल हैं। समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि यह पाबंदी समिति द्वारा संचालित सभी मंदिरों पर लागू होगी।
चार धाम यात्रा में बद्रीनाथ और केदारनाथ के अलावा गंगोत्री और यमुनोत्री धाम भी शामिल हैं। गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट अक्षय तृतीया के अवसर पर 19 अप्रैल को खोले जाने हैं। यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर पहले से ही बहस चल रही है।
उल्लेखनीय है कि इसी महीने की शुरुआत में हरिद्वार के हर की पौड़ी क्षेत्र में ‘गैर-हिंदुओं के लिए प्रवेश वर्जित’ संबंधी पोस्टर लगाए गए थे, जिससे विवाद खड़ा हो गया था। इन पोस्टरों में पूरे क्षेत्र को ‘हिंदू क्षेत्र’ घोषित किया गया था, जिसने सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक पहुंच और समान अधिकारों को लेकर बहस को और तेज कर दिया है।
Author: Deepak Mittal










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