बीजापुर: एक तरफ जिले में सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है, दूसरी तरफ सड़क ने फिर एक ज़िंदगी छीन ली। बीजापुर जिले में बीती रात हुए एक दर्दनाक हादसे में फॉरेस्ट बीट गार्ड संदीप राणा की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा ग्राम पंचायत मुर्किनार के पास उस वक्त हुआ, जब वह ड्यूटी खत्म कर बाइक से घर लौट रहे थे।
मृतक संदीप राणा, बारसूर के ग्राम ऐरपुंड के निवासी थे और वर्तमान में बीजापुर के आरईएस कॉलोनी में रहकर ग्राम पेंकराम में फॉरेस्ट बीट गार्ड के पद पर सेवाएं दे रहे थे। देर रात पेंकराम से बीजापुर लौटते समय उनकी बाइक अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई। हादसा इतना भीषण था कि संदीप राणा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
अंधेरा, संकेतों की कमी और सवालों की बाढ़
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। हादसे के बाद इलाके में शोक की लहर है। स्थानीय ग्रामीणों ने सड़क पर पर्याप्त रोशनी और सुरक्षा संकेतों की कमी को हादसे की बड़ी वजह बताया है।
जागरूकता बनाम हकीकत
गौरतलब है कि जिले में 2 अक्टूबर से सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है। यातायात विभाग गांव-गांव, स्कूलों, बाजारों और चौक-चौराहों पर लोगों को हेलमेट पहनने, गति सीमा का पालन करने और सावधानी बरतने की अपील कर रहा है।
लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सिर्फ जागरूकता अभियान काफी नहीं, जब तक सड़क की हालत, रोशनी, संकेत और सुरक्षा मानक मजबूत नहीं होंगे।
विभाग में शोक, परिवार को सहायता का आश्वासन
फॉरेस्ट विभाग और पुलिस ने मृतक के परिजनों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है। सहकर्मियों के अनुसार, संदीप राणा एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी थे। उनके असमय निधन से विभाग में गहरा शोक व्याप्त है।
बड़ा सवाल
जब सड़क सुरक्षा सप्ताह में भी हादसे नहीं रुक पा रहे,
तो क्या ज़मीनी स्तर पर सुरक्षा सिर्फ कागज़ों तक सीमित है?
बीजापुर में यह हादसा एक बार फिर प्रशासन और सिस्टम को आईना दिखा गया है।
Author: Deepak Mittal










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