ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है- बोले Navy Chief; वाइस एडमिरल का खुलासा- युद्धविराम के लिए मजबूर हुआ था पाकिस्तान

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Operation Sindoor remains in progress: नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने मंगलवार को कहा कि मई में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान बल के आक्रामक रुख के कारण पाकिस्तानी नौसेना को उसके बंदरगाहों के करीब रहने पर मजबूर होना पड़ा।

एडमिरल त्रिपाठी ने अपने वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के साथ तनाव के बाद पिछले सात-आठ महीनों में पश्चिमी अरब सागर सहित अन्य स्थानों पर उच्च पैमाने पर अपने जहाजों और पनडुब्बियों को तत्परता के साथ तैनात रखा है। नौसेना प्रमुख ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अब भी जारी है, लेकिन उन्होंने इस बारे में विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया।

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विमानवाहक पोत की तैनाती समेत आक्रामक रुख और तत्काल कार्रवाई ने पाकिस्तानी नौसेना को उसके बंदरगाहों या मकरान तट के पास रहने के लिए मजबूर कर दिया। नौसेना प्रमुख ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पाकिस्तान पर वित्तीय दबाव पड़ा है, क्योंकि संघर्ष के बाद बड़ी संख्या में व्यापारिक जहाजों ने पाकिस्तान की यात्रा करने से परहेज किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जाने वाले जहाजों के बीमा की लागत भी बढ़ गई है।

पाकिस्तान ने युद्धविराम की अपील की : वाइस एडमिरल स्वामीनाथन

वहीं, वाइस एडमिरल के. स्वामीनाथन ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय नौसेना के आक्रामक कार्रवाई के रुख के कारण पाकिस्तान संघर्ष विराम का अनुरोध करने पर मजबूर हुआ। नौसेना दिवस से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए वाइस एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहुत ही कम समय में 30 से अधिक जहाजों और पनडुब्बियों को अभूतपूर्व तरीके से तैनात किया गया।

नौसेना की पश्चिमी कमान के प्रमुख ने कहा, हमारे अग्रिम पंक्ति के जहाज, विमानवाहक पोत विक्रांत के ‘कैरियर बैटल ग्रुप’ के साथ में मकरान तट पर युद्ध के लिए तैयार थे। कैरियर बैटल ग्रुप एक नौसैनिक समूह है जिसमें एक या अधिक विमान वाहक के साथ-साथ अन्य युद्धपोत जैसे विध्वंसक, फ्रिगेट और पनडुब्बियां शामिल होती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना की आक्रामक तैनाती और रुख के कारण पाकिस्तानी नौसेना को अपने तट के करीब रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। वाइस एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा, वास्तव में भारतीय नौसेना द्वारा आक्रामक कार्रवाई करने के रुख को पाकिस्तान द्वारा युद्ध विराम का अनुरोध करने के महत्वपूर्ण कारकों में से एक माना जा सकता है।

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