नई दिल्ली: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने नोएडा में जलभराव के कारण एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए नोएडा अथॉरिटी और अन्य संबंधित एजेंसियों से जवाब तलब किया है। ट्रिब्यूनल ने स्टॉर्मवॉटर मैनेजमेंट में कथित खामियों और लंबे समय तक जलभराव पर गहरी चिंता जताई है।
NGT ने इस मामले में एक अखबार की रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया, जिसमें बताया गया था कि सेक्टर-150 में एक कमर्शियल साइट पर पानी से भरे गड्ढे में कार गिरने से युवराज मेहता की डूबकर मौत हो गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, कोहरे के कारण अचानक राइट-एंगल टर्न लेते समय उनकी कार पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी।
चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर ए. सेंथिल वेल की बेंच ने कहा कि जिस जमीन पर यह हादसा हुआ, वह पहले एक निजी मॉल परियोजना के लिए आवंटित थी, लेकिन बीते करीब दस वर्षों से वहां बारिश का पानी और आसपास की हाउसिंग सोसाइटियों का गंदा पानी जमा होता रहा, जिससे वह स्थान एक तालाब में तब्दील हो गया।
ट्रिब्यूनल ने यह भी टिप्पणी की कि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा वर्ष 2015 में तैयार किया गया स्टॉर्मवॉटर मैनेजमेंट प्लान कई सर्वे और साइट निरीक्षणों के बावजूद केवल कागजों तक सीमित रह गया। बेंच के अनुसार, रेगुलेटर और नियंत्रित आउटलेट की व्यवस्था न होने के कारण बारिश का पानी हिंडन नदी में छोड़ा नहीं जा सका, जिससे आसपास के क्षेत्रों में जलभराव हुआ और कई हाउसिंग सोसाइटियों के बेसमेंट तक पानी भर गया।
NGT ने जलभराव को लेकर नोएडा अथॉरिटी की कथित निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए। ट्रिब्यूनल ने कहा कि खबर से स्पष्ट होता है कि सुधारात्मक कदम उठाने में लापरवाही बरती गई, जिसका नतीजा एक व्यक्ति की मौत के रूप में सामने आया। यह मामला पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है।
इस प्रकरण में NGT ने नोएडा अथॉरिटी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य के पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव और गौतम बुद्ध नगर के जिला मजिस्ट्रेट को पक्षकार बनाया है। ट्रिब्यूनल ने सभी प्रतिवादियों को निर्देश दिया है कि वे 10 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले हलफनामे के साथ अपना जवाब दाखिल करें।
Author: Deepak Mittal










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