गुमशुदा बच्ची का आठ साल बाद भी नहीं चला पता, हाईकोर्ट ने गृह सचिव को किया तलब

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रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने गुमला जिले से वर्ष 2018 से लापता छह वर्षीय बच्ची के मामले में राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। बच्ची की मां की ओर से दायर हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने आठ साल बाद भी बच्ची का कोई सुराग न लगने पर गंभीर नाराजगी जताई है।

जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की खंडपीठ में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट के निर्देश पर गुमला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्वयं उपस्थित हुए। एसपी ने अदालत को बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एक नई विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है। एसआईटी ने दिल्ली जाकर बच्ची की तलाश से जुड़े संभावित सुराग जुटाने की कोशिश की और उसकी तस्वीरें विभिन्न स्थानों पर प्रसारित कराई गई हैं, लेकिन अब तक बच्ची का कोई पता नहीं चल सका है।

हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 27 जनवरी तय करते हुए राज्य के गृह सचिव को ऑनलाइन उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बच्चों के अपहरण के हालिया मामलों में गुलगुलिया गिरोह की संलिप्तता का हवाला देते हुए मौखिक टिप्पणी की और कहा कि झारखंड में राजस्थान समेत अन्य राज्यों से आने वाले घुमंतू समुदायों के लिए कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है।

अदालत ने कहा कि ये लोग अलग-अलग जगहों पर टेंट लगाकर रहते हैं, लेकिन न तो पुलिस उनके आधार कार्ड या पहचान की जांच करती है और न ही राज्य सरकार ने इनके लिए कोई ठोस नियम बनाए हैं। कोर्ट ने आशंका जताई कि कई बार ऐसे समूह आपराधिक गतिविधियों में भी शामिल पाए जाते हैं, ऐसे में इनके लिए निगरानी और नियंत्रण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाना जरूरी है।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य में बच्चों की तस्करी का एक सक्रिय नेटवर्क काम कर रहा है, जिस पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चों के लापता और तस्करी से जुड़े मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

यह मामला गुमला जिले की बच्ची की मां चंद्रमुनि उराइन द्वारा सितंबर 2018 में दायर हैबियस कॉर्पस याचिका से जुड़ा है। बच्ची के लापता होने के बाद परिजनों ने कई बार पुलिस से गुहार लगाई, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने पर मामला हाईकोर्ट पहुंचा। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने पक्ष रखा। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह बच्चों की तस्करी रोकने और लापता मामलों के समाधान के लिए ठोस नीति और प्रभावी कदम उठाए।

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