नौकरी और मानदेय को लेकर एनयूएलएम मिशन मैनेजर व सामुदायिक संगठनकर्ताओं की गुहार, मंत्री अरुण साव को सौंपा ज्ञापन

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नौकरी और मानदेय को लेकर एनयूएलएम मिशन मैनेजर व सामुदायिक संगठनकर्ताओं की गुहार, मंत्री अरुण साव को सौंपा ज्ञापन

दल्ली राजहरा।राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) के मिशन मैनेजर और सामुदायिक संगठनकर्ता पिछले कई वर्षों से शहरी गरीबों की आजीविका और सामुदायिक सेवाओं को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन के बाद इन कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटक गया है। नौकरी और मानदेय की अनिश्चितता के चलते अब इन कर्मियों ने सरकार से गुहार लगाई है।

राजधानी रायपुर में प्रदेशभर से पहुंचे करीब 150 मिशन मैनेजर और सामुदायिक संगठनकर्ताओं ने नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान उन्होंने अपनी सेवाओं को सुरक्षित रखने और मानदेय की निरंतरता सुनिश्चित करने की मांग रखी।
मिशन मैनेजर केतन नायक ने बताया कि देशभर में शहरी आजीविका मिशन गरीबों के आर्थिक सशक्तिकरण, रोजगार प्रशिक्षण, महिला स्व-सहायता समूहों की मजबूती और शहरी गरीबों की सामाजिक सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभा रहा है। छत्तीसगढ़ में भी वर्षों से कार्यरत मिशन मैनेजर और सामुदायिक संगठनकर्ता अपने अनुभव और समर्पण से गरीबों के बीच भरोसे का वातावरण बना चुके हैं। यदि उनकी सेवाएं बाधित होती हैं तो योजनाओं पर सीधा असर पड़ेगा और शहरी गरीबों के उत्थान की प्रक्रिया रुक जाएगी।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि अन्य राज्यों ने अपने स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था कर कर्मचारियों की सेवाएं जारी रखी हैं, ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार को भी ठोस कदम उठाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समाधान जल्द नहीं निकला तो प्रदेशभर में आंदोलन की स्थिति बन सकती है।

संदर्भ और पृष्ठभूमि

दीनदयाल अंत्योदय योजना (राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन) का उद्देश्य शहरी गरीब परिवारों को टिकाऊ आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है।

मिशन के तहत महिलाओं के स्व-सहायता समूहों का गठन, कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार ऋण, स्ट्रीट वेंडर्स को सहयोग और शहरी गरीब युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने जैसे कार्य किए जाते हैं।

छत्तीसगढ़ में लगभग हर जिले में इस मिशन के अंतर्गत मिशन मैनेजर और सामुदायिक संगठनकर्ता कार्यरत हैं।

इन कर्मचारियों की मांग है कि सरकार उनके मानदेय और सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करे, ताकि वर्षों से चल रही योजनाओं की रफ्तार और शहरी गरीबों का भविष्य प्रभावित न हो।

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Author: Deepak Mittal

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