मुंगेली: नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के गंभीर मामले में मुंगेली की एफ.टी.सी. अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सोम की अदालत ने सुनाया। मामले में निर्णय 9 जनवरी 2026 को सुरक्षित रखा गया था, जिसे आज घोषित किया गया।
प्रकरण सिटी कोतवाली मुंगेली थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जिसमें आरोपी पीड़िता का जीजा बताया गया है। मामले की कानूनी प्रक्रिया 9 दिसंबर 2024 को अपराध निर्धारण से शुरू हुई थी, जबकि 17 जनवरी 2025 से साक्ष्य की सुनवाई प्रारंभ हुई।
अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक मोतीलाल साहू और लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ने प्रभावी पैरवी की। अदालत ने मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर यह सिद्ध माना कि आरोपी ने 14 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ गंभीर लैंगिक अपराध किया है।
अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 65(1), 64(2)(2) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(सी)/6 और 4(2) के तहत दोषसिद्ध किया। सजा के तहत—
-
धारा 4(2) पॉक्सो एक्ट: आजीवन कारावास एवं 2,000 रुपये अर्थदंड
-
धारा 6 पॉक्सो एक्ट: आजीवन कारावास एवं 2,000 रुपये अर्थदंड
अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में प्रत्येक अपराध के लिए अलग-अलग 6 माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा।
अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के तहत विचारण अवधि में बिताई गई निरोध अवधि का लाभ भी आरोपी को दिया है। आरोपी 9 अक्टूबर 2024 से न्यायिक अभिरक्षा में है और 9.10.2024 से 13.01.2026 तक की कुल 1 वर्ष 3 माह 4 दिन की अवधि सजा में समायोजित की जाएगी।
पीड़िता को हुए मानसिक, शारीरिक एवं सामाजिक नुकसान को ध्यान में रखते हुए अदालत ने छत्तीसगढ़ शासन की यौन उत्पीड़न पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। इसमें से 1 लाख रुपये तत्काल पीड़िता के बैंक खाते में जमा किए जाएंगे, जबकि शेष 4 लाख रुपये उसके वयस्क होने तक राष्ट्रीयकृत बैंक में सावधि जमा के रूप में सुरक्षित रखे जाएंगे।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत पीड़िता की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखने के निर्देश दिए हैं। पीड़िता का नाम, पता, फोटो अथवा परिवार से संबंधित कोई भी जानकारी प्रकाशित करना कानूनन दंडनीय होगा।
इसके साथ ही अदालत ने निर्णय की प्रति आरोपी को निःशुल्क उपलब्ध कराने, सजा वारंट जारी कर उसे जिला जेल मुंगेली भेजने तथा निर्णय की प्रतिलिपि लोक अभियोजक, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला मजिस्ट्रेट और जेल अधीक्षक को भेजने के आदेश दिए हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि नाबालिगों के विरुद्ध होने वाले अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। यह निर्णय न केवल पीड़िता और उसके परिवार के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि समाज में ऐसे जघन्य अपराधों के खिलाफ एक सख्त संदेश भी है।
Author: Deepak Mittal










Total Users : 8141819
Total views : 8154228