Khaleda Zia Funeral: राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्दे-खाक हुईं खालिदा जिया, ढाका की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब

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तीन दिवसीय राजकीय शोक के बीच बांग्लादेश ने अपनी सबसे प्रभावशाली नेता को दी अंतिम विदाई

ढाका: बांग्लादेश की राजनीति का एक ऐतिहासिक अध्याय आज हमेशा के लिए बंद हो गया। पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी (BNP) प्रमुख खालिदा जिया को पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्दे-खाक कर दिया गया। 30 दिसंबर को 80 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया था। उनकी अंतिम विदाई के मौके पर ढाका की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिसने इस पल को भावनात्मक और ऐतिहासिक बना दिया।

तीन दिवसीय राजकीय शोक के बीच खालिदा जिया को शेर-ए-बांग्ला नगर में अपने पति और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की कब्र के बगल में दफनाया गया। यह दृश्य न सिर्फ एक नेता की विदाई था, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति के एक युग का अंत भी।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई

खालिदा जिया की नमाज-ए-जनाजा ढाका के माणिक मिया एवेन्यू और संसद भवन के साउथ प्लाजा में अदा की गई।
बैतुल मुकर्रम राष्ट्रीय मस्जिद के खतीब ने जनाजे की नमाज का नेतृत्व किया। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बावजूद, लाखों समर्थक अपने नेता की एक झलक पाने और अंतिम विदाई देने के लिए सड़कों पर मौजूद रहे।

अंतिम संस्कार में दिखी कूटनीतिक मौजूदगी

खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में दक्षिण एशिया की मजबूत कूटनीतिक मौजूदगी देखने को मिली।
भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ढाका पहुंचे और भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा—

  • पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज सादिक

  • नेपाल, श्रीलंका और भूटान के विदेश मंत्री

  • मालदीव के विशेष दूत

भी इस ऐतिहासिक मौके के गवाह बने। यह उपस्थिति क्षेत्रीय राजनीति में खालिदा जिया के प्रभाव को दर्शाती है।

बांग्लादेशी राजनीति में दशकों तक रहा दबदबा

खालिदा जिया ने सैन्य शासन के अंत और लोकतंत्र की बहाली के दौर में अपनी मजबूत राजनीतिक पहचान बनाई।
वह बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री रहीं और दशकों तक सत्ता और विपक्ष दोनों की राजनीति का केंद्र बनी रहीं।
बीएनपी प्रमुख के रूप में उन्होंने कई चुनावों में पार्टी को जीत दिलाई और देश की नीतियों को दिशा दी।
उनके निधन को बांग्लादेश की मौजूदा राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

कड़ी सुरक्षा, सार्वजनिक अवकाश और शोक का माहौल

अंतिम संस्कार को देखते हुए ढाका में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए।

  • सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहा

  • प्रमुख सड़कों को डायवर्ट किया गया

  • अंतरराष्ट्रीय मेहमानों और आम जनता की आवाजाही के लिए विशेष प्रबंध किए गए

अंतरिम सरकार और BNP के वरिष्ठ नेता आपसी समन्वय से अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी करते नजर आए।

एक युग का अंत

खालिदा जिया की अंतिम विदाई सिर्फ एक राजनीतिक नेता का जाना नहीं है, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति के उस दौर का अंत है, जिसने देश की दिशा और दशा तय की।
ढाका की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण था कि खालिदा जिया सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि एक दौर की पहचान थीं।

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Author: Deepak Mittal

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